श्री किशोरी शरण अली ग्रंथावली

श्री किशोरी शरण अली ग्रंथावली श्री राधा वल्लभ सम्प्रदाय के रसिक श्री किशोरी शरण अली द्वारा लिखी गई है। लेखक: श्री किशोरी अली

17 लेख उपलब्ध हैं

  1. हमैं इक लाड़िली सौं काम - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

    हमें तो केवल श्री राधा से ही काम है जो हमारी स्वामिनी हैं। हर दिन, हर क्षण, हम श्री राधा के रूप का ही चिंतन करते हैं और हम श्री राधा के नाम का ही जप करते हैं।

  2. हमारी राधे प्रीति-रीति पहिचानैं - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

    प्रीति की रीति को तो एकमात्र हमारी श्री राधा ही जानती हैं। इनके सिवा इस निष्काम प्रेम की रीति के मार्ग को कोई नहीं जानता है।

  3. हमैं तौ इक आस किशोरीजू की - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

    हमें तो एक आस श्री किशोरी जी से है। हर क्षण हम श्री राधारानी की गोरी छवि निधि की रूप माधुरी का निरंतर सेवन करते हैं । यदि भूख लगती है तो उन्हीं (भोरी जू) की प्रसादी पा लेते हैं।

  4. हमारैं माई राधा नाम की टेक - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

    हम केवल श्री राधा नाम का जाप करने की प्रतिज्ञा करते हैं। श्री कृष्ण जो सभी रसिकों के सिरमौर है वो भी श्री राधा का नाम ऊँचे स्वर से पुकारते हैं।

  5. हमारें माई राधेजू प्रान-अधार - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

    केवल और केवल श्री राधा रानी ही हमारे प्राणों का आधार हैं। श्री किशोरी अली कहते हैं की श्री प्रिया जू का गुणगान करके उनको नित्य ही समस्त सुखों एवं रसों का सार प्राप्त होता है।

  6. हमारी लाड़िली ही इष्ट - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

    हमारी इष्टदेव तो केवल लाडिली सरकार श्री राधारानी ही हैं, जिनका नित्य नाम जप करने से कभी भी कुछ भी अनिष्ठ (अमंगल) नहीं हो सकता। श्री किशोरी अली कहते हैं कि हम तो इनके धाम वृन्दावन में ही सदा बसते हैं और इन्ही का उच्छिष्ट (प्रसाद) सेवन करते हैं।

  7. हमैं तौ बल एक लाड़िलीजू कौ - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

    हमारा बल एक मात्र श्री राधा रानी है। हमें किसी और से क्या काम (चाहे वो भगवान् हो)? हमारी स्वामिनी और सर्वस्व तो एक मात्र किशोरी जी ही हैं।

  8. जो कोउ श्री राधा जस गावे - श्री किशोरी अलि, किशोरी अलि ग्रंथावली

    श्री किशोरी अलि जी कहते है, 'श्री राधा' की महिमा अंतहीन है। जो जीव श्री राधा नाम को ह्रदय से पुकारता है तो श्रीकृष्ण, जो श्री राधा नाम के अति लोभी है वहाँ दौड़ करके आते है। श्री राधा नाम के उपासक को श्री कृष्ण अपनी दासता प्रदान कर देते है।

  9. हमारें बल इक राधिका प्यारी, प्यारी हू सुख देत सहज ही, जानत निजु सहचारी। - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

    मेरा बल केवल एक श्री राधा प्यारी हैं। उनके समान कृपालु कौन है जो अपनी सहचरी मान कर नित्य (हर क्षण) रस प्रदान करती हैं। श्री अली किशोरी कहते हैं कि हम श्री राधा पर बलिहारी हैं, जो मेरे जीवन की सम्पूर्ण निज सम्पति हैं।

  10. स्वामिनी कब यौं तुम्हे लड़ाऊँ - श्री अली किशोरी, श्री किशोरी अली ग्रंथवाली

    श्री राधे, ऐसा कब होगा कि आपकी प्रेम पूर्वक मैं सेवा और लाड़ लड़ाउंगी और आपके चिकने और लम्बे कारे केशों में सुगन्धित तेल लगाउंगी ?

  11. जय जय श्री वृन्दावन धाम - श्री अली किशोरी, श्री किशोरी अली ग्रंथवाली

    श्री अली किशोरी जी कहते हैं, श्री वृन्दावन धाम की जय हो जय हो, क्योंकि श्री वृन्दावन धाम परम हितकारी है, यह सब सुखों को देने वाला एवं रसिको का विश्राम है ।

  12. जय जय श्री वृन्दावन धाम - श्री किशोरी अली, श्री किशोरी अली ग्रंथवाली

    श्री वृंदावन धाम की सभी महिमा, असीम आनंद का निवास और रसिकों के लिए अनुकूल और आरामदायक स्थान है। वृंदावन के दर्शन (दृष्टि) होने से, सभी आध्यात्मिक इच्छाएं पूरी होती हैं। श्री अली किशोरी कहते हैं, श्री वृंदावन की महिमा का वर्णन कौन करेगा, यहां तक कि भगवान श्री कृष्ण हमेशा वृंदावन की महिमा गाते हैं।