मेरी और मोहन की बातें - श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
मेरी और मोहन के बीच की बातें या तो वे जानते हैं या मैं। मेरे दिल के दुख दर्द भरी बातें या तो वे जानते हैं या मैं।
श्री बिंदु जी महाराज भक्त एवं कवी थे जिन्होंने "मोहन मोहिनी" के रूप में विभिन्न काव्य पदों का संग्रह किया है ।
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मेरी और मोहन के बीच की बातें या तो वे जानते हैं या मैं। मेरे दिल के दुख दर्द भरी बातें या तो वे जानते हैं या मैं।
हम सदा श्याम श्यामा पुकारा करेंगें और उनका नित्य नवल रूप निशिदिन निहारा करेंगें ।
जो जीव श्यामसुन्दर का भजन करता रहता है उसका यह संसार सागर कुछ नहीं बिगाड़ सकता एवं वह इसे पार कर लेता है ।
हे श्री राधा कृष्ण, आपके चरणों में ही अधम जीवों का कल्याण है। फिर समस्त कष्टों को सहना मेरे भाग्य में ही क्यों है।
एक दिन मैंने आँसुओं से श्री कृष्ण को पुकारा और कहा, "मैं चाहे अच्छा हूँ या बुरा, पर मैं केवल आपका हूँ।"
मैं स्वयं को भक्त मानता हूँ, परन्तु वास्तव में पापियों का मुकुट मणि हूँ। ब्रज के भगवान श्री कृष्ण मेरे पाखंड पर हंसते हैं।
हे भगवान कृष्ण, मैं अपने कष्टों से भयभीत होकर तुम्हें नहीं छोडूंगा। अगर मुझे तुम्हें छोड़ना पड़ा तो मैं कुछ बड़ी उथल-पुथल करूंगा।
मैं श्री कृष्ण को नित्य निहार रहा हूँ। मैं उनकी झलकियों पर मुग्ध हो रहा हूँ।
घनश्याम श्रीकृष्ण का चिंतन करने से दिव्य अनुभूति होती है तथा दृश्य प्रपंच की सत्ता समाप्त हो जाती है।