हम तौ राधाकृष्न-उपासी - ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (11)
हम तो केवल श्री राधा-कृष्ण के ही उपासक हैं। गौर वर्ण की श्री राधा और श्याम वर्ण के श्री कृष्ण की यह जोड़ी अत्यंत अभिराम, मनमोहक और सुख की राशि है।
ब्रज निधि पद संग्रह ब्रज निधि ग्रंथावली का 21वां अध्याय है जिसमें श्री ब्रजनिधि जी द्वारा रचित विभिन्न पदों का संकलन है।
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हम तो केवल श्री राधा-कृष्ण के ही उपासक हैं। गौर वर्ण की श्री राधा और श्याम वर्ण के श्री कृष्ण की यह जोड़ी अत्यंत अभिराम, मनमोहक और सुख की राशि है।
हे छबीली राधे! मुझे कब आप अपने दर्शन से तृप्त करेंगीं? मेरी अँखियाँ चकोरी पक्षी की भाँति आपके चंद्रमुख की सुधा-रस पान करने के लिए व्याकुल हैं।
सुख की मूर्ति, वृषभानु दुलारी श्री राधा के मुख कमल को देखकर मन में अपार आनंद होता है।
रंग महल में रंग बरस रहा है। दोनों श्री श्यामाश्याम उत्सुकता से बढ़-चढ़कर तान ले रहे हैं और सरस नृत्य कर रहे हैं।
छबीली बिहारिनि श्री राधा जू की छवि पर मैं स्वयं को न्योंछावर करता हूँ। ब्रज की नित्य नवल किशोरी, सखियों की शिरोमणि, श्री श्यामा जू ने कुञ्ज-बिहारी श्री कृष्ण को अपने वश में कर रखा है।
मुझे मेरी स्वामिनी श्री राधिका बहुत प्यारी लगती हैं । उनके मृग के समान नैन हैं, कोयल के समान वाणी है, एवं प्रियतम श्री श्यामसुन्दर को सुख दान करने वाली हैं ।
हे वृंदावन की महारानी, श्री राधा रानी, मुझ पर कृपा कीजिए । तुम्हारी महिमा अगाध एवं अपरंपार है जिसका पार वेद भी नहीं पा सकते अत: वे नेती नेती कह कर वर्णन करते हैं ।
श्री राधा के मुख चन्द्र को देख कर कोटि चन्द्रमा को न्यौछवार कर दो । उनकी दन्त पंक्तियों पर दामिनी, नासिका पर शुक (तोता), भौंह पर धनुष को न्यौछवार कर दो, और श्री राधा के नैनों को निहार कर अपने तीन प्रकार के तापों (दैहिक, दैविक एवं भौतिक ताप) को जला डालो ।
श्री वृंदावन धाम की समानता केवल वृंदावन धाम ही कर सकता है जहां यमुना का मनोहर पुलिन है, जहां सुंदर वंशीवट है जहां श्री कृष्ण ने मुरली बजाई थी ।