श्री हित कमलनैन

श्री हित कमलनैन, वृंदावन धाम के रसिक संत, श्री राधा वल्लभ सम्प्रदाय से सम्बंधित हैं ।

10 लेख उपलब्ध हैं

  1. रसना! श्रीराधाबल्लभ कहि री - श्री हित कमलनैन, श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (205)

    हे रसना! निरन्तर "श्रीराधाबल्लभ" नाम का ही उच्चारण कर। श्रुति, स्मृति और पुराणों के विविध विषयों में अधिक न उलझकर, इस नाम-रस को दृढ़तापूर्वक ग्रहण कर।

  2. प्रीतम मोहि प्रानन हूँ तें प्यारौ - श्री हित कमलनैन, श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (110)

    श्री राधा कहती हैं - प्रियतम मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं। मैं प्रेम से रात-दिन उन्हें हृदय से लगाये रहती हूँ। किंचित् भी अपने से दूर नहीं करती।

  3. वन विहरन चले दोऊ प्यारे - श्री हित कमलनैन, श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (65)

    श्री श्यामा श्याम वन-विहार करने चले हैं । दोनों नृत्य एवं गान करते हुए सखियों के ह्रदय में प्रेम बढ़ा रहे हैं, दोनों रूप की राशि हैं एवं तीनों लोकों के अंधकार को मिटानेवाले हैं ।

  4. सजनी नव निकुंज सु केलि - श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (180)

    हे सखी, श्री प्रिया प्रियतम की नव निकुंज की केलि परम अद्बुत है । गौर वर्ण श्री राधिका श्याम वर्ण श्री कृष्ण से ऐसे आनंद से लिपटी हैं मानों तमाल वृक्ष से बेलि लिपटी हुई रहती हैं ।

  5. श्रीहित कमलनैंन जी की जीवनी

    गोस्वामी कमलनैंन जी श्री राधावल्लभ सम्प्रदाय के वाणीकारों में अन्यतम हैं। इनका जन्म श्रीहित कुल में 1635 की आषाढ़ कृष्णा पंचमी के दिन वृन्दावन में हुआ था।

  6. किशोरी ! मेरी जीवन प्राण - श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (138)

    श्री लाल जी के वचन श्री प्रिया जी से: हे किशोरी जी केवल आप ही मेरी जीवन प्राण हो, मैं बार बार ऐसा कह कर तुमको क्या समझाऊँ, मेरी अन्य दूसरी कोई गति है ही नहीं, बस आपका ही एक मात्र अवलंभ है ।

  7. बिहरत दोऊ लाड़िली लाल - श्री हित कमलनैन, श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (43)

    श्री लाड़िली लाल दोनों वृंदावन में विहार परायण हैं । श्री श्यामा श्याम के बड़े एवं सुंदर नैनों को देख देख देख सहचरियों के हृदय और नयन शीतल बने रहते हैं ।

  8. भजियैं नंदनंदन-श्रीराधा - श्री हित कमल नैंन, श्री हित कमल नैंन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (206.6)

    श्री हित कमल नैन जी कहते हैं कि हे मन नित्य ही श्री राधा कृष्ण का भजन कर, जो संसार का मोह एवं पुनः जनम मरण की बाधा को मिटाने वाला है।"

  9. देखौ माई सुंदर कुंज बनी - श्री हित कमल नैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (20)

    हे सखी, देखो कितनी सुंदर कुंज बनी है । नवल नागरी अरु नागर वहाँ विराजमान हैं जिसकी अत्यंत सुंदर छवि का वर्णन करना सर्वथा असम्भव है ।