पदावली [श्री नंददास जी]

पदावली श्री नंददास जी द्वारा रचित नंददास ग्रंथावली का चौदहवाँ अध्याय है जिसमें श्री कृष्ण लीला से सम्बंधित अनुमानतः 200 पदों का संग्रह किया गया है।

10 लेख उपलब्ध हैं

  1. अरी तेरी सहज की मुसिक्यान - श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (68)

    इस पद में सखियाँ श्री राधा की सुंदरता और उनके प्रति श्री कृष्ण के समर्पण का वर्णन करती हुई कहती हैं कि हे सखी! तेरी सहज मनमोहक मुस्कान ने श्री कृष्ण को मोह लिया है। सारा संसार जिनका यश गाता है, वे श्री कृष्ण अब तुम्हारे अधीन हैं।

  2. वृंदावन बंसीवट जमुनातट बंसी रट - श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (122)

    यमुना के तट पर, बंसीवट की शीतल छाया में, बांसुरी की मधुर ध्वनि गूँज रही है। रसिक श्रीकृष्णचंद्र ने वन में रास लीला का दिव्य आयोजन रचा है।

  3. जाकौं वेद रटत ब्रह्मा रटत - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (1)

    जिसके नाम को वेद रटते हैं, ब्रह्मा रटते हैं, भगवान शिव रटते हैं, शेष रटते हैं, नारद, शुकदेव एवं वेद व्यास जी रटते हैं लेकिन पार नहीं पाते।

  4. तेरी भौंह की मरौरन तें - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (72)

    हे प्यारी राधिके, तुम्हारी चढ़ी हुई भौंह को देखकर ही श्री लाल जी (श्री कृष्ण) त्रिभंगी मुद्रा में आ जाते हैं और अंजन छुवाने के कारण श्याम कहलाते हैं।

  5. कृष्ण नाम जबतें श्रवण सुन्यो री आली - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (54)

    श्री नंददास जी एक सखी रूप से अन्य सखी से कहते हैं कि - हे सखि ! जब से कानो में कृष्ण का नाम सुना है , तब से मैं अपना घर संसार भूल, बाँवरी बन गयी हूँ ।

  6. श्रीवृषभान नृपति के आंगन - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (53)

    आज सब जन राजा श्री वृषभानु के प्रांगण में बधाई गीत गाकर उत्सव मना रहे हैं जहाँ रानी कीर्ति की कोख में समस्त गुणों से युक्त, सुख की खानी स्वरूपा एक पुत्री [श्री राधा] ने जन्म लिया है ।

  7. देखों देखों री नागरनट - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (119)

    श्री नंददास कहते हैं "अरे सखी, तनिक देखो तो नागरनट को, सर पर मुकुट लटक रही है, श्री यमुना के पुलिन पर गोपियों के मध्य कैसा अनुपम नृत्य कर रहे हैं।"