श्यामा श्याम गीत

श्यामा श्याम रस का साकहस्त स्वरूप, श्यामा श्याम गीत जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की एक अनूठी रचना है। इसके प्रत्येक भक्तिपूर्ण दोहे ईश्वरीय प्रेम की एक मंत्रमुग्ध करने वाली भावना से ग्रस्त हैं। लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

38 लेख उपलब्ध हैं

  1. माँगना हो तो माँगो सेवा श्याम श्यामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (55)

    यदि कुछ माँगना ही है तो केवल श्यामा-श्याम की सेवा माँगो। उस सेवा के लिए निष्काम प्रेम की याचना करनी चाहिये। इसके अतिरिक्त कोई अन्य इच्छा या याचना हृदय में न आने पाए — यही सच्ची भक्ति का मार्ग है।

  2. श्यामा श्याम जायँ नहिं तजि ब्रजधामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (973)

    दृढ़ विश्वास रखो कि श्यामा श्याम सदैव ब्रज में निवास करते हैं। उनके लिए रोकर आँसू बहाओ, निश्चित ही वे तुमको प्राप्त होंगें।

  3. तेरे बने बिनु जीना जीना नहिं श्यामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (151)

    हे श्यामा [श्री राधा]! तुम्हारे बने बिना जीवन भी भला कोई जीवन है (अर्थात् व्यर्थ है)। यूँ तो पेट सूअर आदि भी भर लेते हैं। यदि तुमसे न मिले तो इस मानव जीवन का उद्देश्य ही क्या है?

  4. ब्रज रज महिमा जानें ब्रज बामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (956)

    ब्रज-रज की महिमा ब्रजांगनाए ही जानती हैं जिन्होंने युगल किशोर श्री श्यामा श्याम को इसी ब्रज की रज में लोटते हुए देखा है।

  5. जो मन बुद्धि दै के भजे आठु यामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (18)

    जो जीव मन-बुद्धि का समर्पण कर निरन्तर श्रीराधा का स्मरण करता है उसका योगक्षेम वह उसी प्रकार वहन करती हैं जिस प्रकार नवजात शिशु की देखभाल माँ करती है।

  6. ललिता चरण चापैं पौढ़ीं कुंज श्यामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (430)

    श्री श्यामा जू एक सुंदर कुंज में लेटी हुई हैं और श्री ललिता जी उनके चरण चाप रही हैं। श्री श्यामसुंदर ललचाते हुए कहते हैं "धन्य धन्य हैं श्री ललिता जी"।

  7. रिद्धि मिले सिद्धि मिले मिले मोक्षधामा - श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (10)

    रिद्धि सिद्धि की प्राप्ति या मोक्ष की प्राप्ति तो अज्ञान ही है। सच्चा ज्ञान तो वही है जिससे श्यामा-श्याम के प्रेम की प्राप्ति हो।

  8. श्यामा रटें श्याम श्याम श्याम रटें श्यामा - श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (1)

    श्री राधा निरन्तर श्याम श्याम की रटना करती हैं। श्री कृष्ण नित्य राधे राधे रटते हैं।ब्रजांगनाएँ रात-दिन श्यामा श्याम के नामामृत का पान करती हैं।

  9. मान लो पतित आपु कहँ कह बामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (37)

    यदि तुम स्वयं को पतित स्वीकार कर श्री श्यामा ज़ू की शरण में जाओ तो तुम्हारा काम बन जाए। बनना ठनना [पतित होते हुए स्वयं को पतित न मानना] त्याग कर जैसे हो वैसे ही श्री श्यामा ज़ू की शरण में जाओ।

  10. उर में बिठाना चाहो जग संग श्यामा - श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (58)

    जिस हृदय में जगत का निवास है, उसमें श्री किशोरी राधिका अपना आसन कैसे स्थापित करें? अंधकार और सूर्य कभी भी एक साथ नहीं रह सकते।

  11. जुग जुग जिए जोरी कहें ब्रजबामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (529)

    जब श्री श्यामा श्याम युगल सरकार गलबाहिं देकर वृंदावन के विभिन्न कुंजों से विचरण करते हैं तब ब्रज सखियाँ भाव विभोर आशीर्वाद देती हैं और कहती हैं: “जुग जुग जिए जोरी”।

  12. श्यामा श्याम में जो गुण सोइ ब्रजधामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (971)

    ऐसी निष्ठा से ब्रज धाम वास करो कि जो श्यामा श्याम में गुण एवं शक्तियाँ हैं वह समस्त गुण शक्तियाँ ब्रज धाम में भी हैं।

  13. श्यामा श्याम नाम, रूप, लीला, गुण, धामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (74)

    जिस ग्रन्थ में श्यामा श्याम के नाम, रूप लीला, गुण, धाम का वर्णन न किया गया हो, उसे दूर से ही प्रणाम करना चाहिये।

  14. तेरे हैं अनन्त पाप - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (34)

    भावार्थ - हे जीव ! अनादिकाल से अनन्तानन्त पाप करने के कारण तेरा मन अत्यंत मलिन हो चुका है अतएव (साधना द्वारा अंतःकरण शुद्धि की मात्रानुसार) श्री राधा धीरे-धीरे ही मन को अच्छी लगेंगी, एकाएक नहीं।