आज कालकल्प जोपै बाराह बरत रह्यो - श्री छबीले वल्लभ गोस्वामी
आज अक्षय तृतीया के पावन दिन पर वह कल्प-काल दिवस प्रकट होता है, जिसका फल नाश नहीं होता — उसका आदि और अंत अनंत से जुड़ा हुआ है।
श्री छबीले वल्लभ गोस्वामी जी 19वीं शताब्दी के एक संत थे जो श्री बांके बिहारी जी के मंदिर के गोस्वामी थे। उनकी समाधि निधिवन में स्थित है ।
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आज अक्षय तृतीया के पावन दिन पर वह कल्प-काल दिवस प्रकट होता है, जिसका फल नाश नहीं होता — उसका आदि और अंत अनंत से जुड़ा हुआ है।
वेदों ने जिन श्री कृष्ण को सदा अजन्मा कहा है, उन श्री कृष्ण का जहां प्राकट्य हुआ, वहाँ का वास करने से जीव कभी भवसिंधु में नहीं फंसता।
जब कोई दीन आर्त भरी पुकार से उसे एक बार भी पुकारता है, तो वह सुनता है।
हे श्री कुंज बिहारी लाल, हे रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास! ऐसी कृपा करो कि मेरे ह्रदय में सदा निवास करो और मुझे सर्वोत्तम धाम श्री वृंदावन का वास प्रदान करो ।
श्री राधा नाम का जप करने से कलिकाल के समस्त कष्ट और क्लेश दूर हो जाते हैं। यह नाम जीवन के मार्ग में आने वाले सभी कंटकों को समाप्त कर देता है और भवसागर की समस्त बाधाओं को मिटा देता है।
इस संसार में ब्रज जैसा कोई स्थान नहीं है, और न ही ब्रजवासियों के समान कोई नर या नारी।
जहाँ नित्य अजन्मा परम पुरुष श्री कृष्ण ने जन्म लिया, उस ब्रज धाम में जीव संसार सागर में फंसता नहीं है।
जिन चरणों की वंदना तीनों लोकों में होती है और जिनका आनंद अपार है, उन चरणों का वंदन स्वयं धरती को अपने फन पर धारण करने वाले शेषनाग भी करते हैं।
रस प्रदायनी अति सुकुमारी श्री राधिका की जय हो। कमल पुष्प के समान कोमल अंगों वाली, प्रेम की खान, श्री श्यामसुंदर की आराधिका की जय हो। श्री कृष्ण की प्राण प्यारी, गौर वर्णा श्री नवल किशोरी जू की जय हो। हे श्री राधिके, अब कृपा कर मेरे ह्रदय के अंधकार का हरण कीजिये।
सभी आशाओं को त्यागकर वृंदावन में निवास करना चाहिए और प्रेमपूर्वक निष्कपट भाव से कुञ्ज-निकुंजों की सेवा में लीन रहना चाहिए।
श्री कृष्ण इस धरती पर अमृत स्वरूप हैं, इस जग के परम ऐश्वर्य हैं, जिन्हें मुनि जन अपने हृदय में सदा के लिए बसाये रहते हैं। वे श्री राधा के परम धन हैं। श्री कृष्ण सुख के स्रोत हैं, जो सदा सबके दुखों का नाश करते हैं। देवता और सिद्धजन अपनी समाधि में जिनका ध्यान करते हैं और जिनके संग के लिए सदैव लालायित रहते हैं।
ब्रज में चारों ओर से नर और नारी 'जै जै' [युगल सरकार की जै हो] पुकार रहे हैं। समस्त देवतागण अपने अपने विमानों से एवं ब्रह्मा-भगवान शंकर भी जै जैकार कर रहे हैं।