श्री छबीले जी

श्री छबीले वल्लभ गोस्वामी जी 19वीं शताब्दी के एक संत थे जो श्री बांके बिहारी जी के मंदिर के गोस्वामी थे। उनकी समाधि निधिवन में स्थित है ।

12 लेख उपलब्ध हैं

  1. कुँजविहारी रसिक वर - श्री छबीले वल्लभ गोस्वामी

    हे श्री कुंज बिहारी लाल, हे रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास! ऐसी कृपा करो कि मेरे ह्रदय में सदा निवास करो और मुझे सर्वोत्तम धाम श्री वृंदावन का वास प्रदान करो ।

  2. कलिकाल कलेशन काटें सबै - श्री छबीले जी

    श्री राधा नाम का जप करने से कलिकाल के समस्त कष्ट और क्लेश दूर हो जाते हैं। यह नाम जीवन के मार्ग में आने वाले सभी कंटकों को समाप्त कर देता है और भवसागर की समस्त बाधाओं को मिटा देता है।

  3. श्री राधिका स्तव - श्री छबीले वल्लभ जी

    रस प्रदायनी अति सुकुमारी श्री राधिका की जय हो। कमल पुष्प के समान कोमल अंगों वाली, प्रेम की खान, श्री श्यामसुंदर की आराधिका की जय हो। श्री कृष्ण की प्राण प्यारी, गौर वर्णा श्री नवल किशोरी जू की जय हो। हे श्री राधिके, अब कृपा कर मेरे ह्रदय के अंधकार का हरण कीजिये।

  4. वसुधा के सुधा जग की सुखमा - श्री छबीले जी

    श्री कृष्ण इस धरती पर अमृत स्वरूप हैं, इस जग के परम ऐश्वर्य हैं, जिन्हें मुनि जन अपने हृदय में सदा के लिए बसाये रहते हैं। वे श्री राधा के परम धन हैं। श्री कृष्ण सुख के स्रोत हैं, जो सदा सबके दुखों का नाश करते हैं। देवता और सिद्धजन अपनी समाधि में जिनका ध्यान करते हैं और जिनके संग के लिए सदैव लालायित रहते हैं।

  5. जै जै मचों ब्रज में चहूँ ओर ते बोल रहे नर नारी जौ जै जै - श्री छबीले जी

    ब्रज में चारों ओर से नर और नारी 'जै जै' [युगल सरकार की जै हो] पुकार रहे हैं। समस्त देवतागण अपने अपने विमानों से एवं ब्रह्मा-भगवान शंकर भी जै जैकार कर रहे हैं।