लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (32)
मैंने लोक-परलोक, परिवार के सुख और अनन्त भौतिक कामनाओं को दूर से ही त्याग दिया है। इतना ही नहीं, जप, व्रत तथा परमार्थ सम्बन्धी समस्त श्रेष्ठ साधनों से भी दीर्घकाल तक अभ्यास करने पर निराश होकर उन्हें छोड़ दिया है।
