46 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं

  1. लीने लली ललतादिक संग उमंग - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (61)

    श्री वृषभानु-दुलारी श्रीराधा अपनी ललिता आदि सखियों के संग अत्यंत उमंग के साथ सुंदर फुलवारी में पधारी हैं जहाँ मालती, कुंद, निवारी तथा गुलाब आदि विविध पुष्पों से सुसज्जित फुलवारी चारों ओर अपनी सुगंध बिखेर रही है।

  2. भ्रंसिन्या - श्रीगोवर्द्धन भट्ट, श्री राधाकुण्ड स्तव (49)

    अरे मन! श्री कृष्ण के चरण कमलों के प्रेमधन को नष्ट कर देने वाली स्त्रियों के परिहासमय स्नेह वचनों में फँस कर प्रेमधन से वञ्चित मत हो। पुत्र-मित्र-वैभवों को नश्वर जान कर उनकी आकांक्षा मत करो। निरन्तर राधादास्य प्रदानकारी वृषभानुनन्दिनी सरसी अर्थात् श्री राधाकुण्ड का ध्यान करो।

  3. सुख निधि श्री गिरिराज तरहटी - गोस्वामी श्री हरिराय जी

    श्री गिरिराज जी की तलहटी समस्त सुखों की निधि (खजाना) है, जहाँ के विभिन्न कुंडों के जल का आचमन करके और उसमें स्नान करके, भक्त बार-बार व्रज-रज में लोटकर आनन्द का अनुभव करते हैं।

  4. क्वचिद् भूत्वा द्विभुजा कृष्णदेहा वंशी - अथर्ववेद, श्रीराधिका तापनीयोपनिषत् (11)

    कभी-कभी श्री राधा द्विभुज श्रीकृष्ण का वेश धारण कर लेती हैं और स्वयं वंशी बजाती हैं। उन श्रीराधिका जू को प्रसन्न करने के लिए देवों के देव श्री कृष्ण स्वयं कुन्द और मन्दार के पुष्पों की मालाएँ बनाकर उन्हें पहनाते हैं और विविध प्रकार से उनकी सेवा करते हैं।

  5. फूल कुंज, बरसाना

    फूल कुंज बरसाना में स्थित है । यह ब्रह्मांचल पर्वत की तलहटी में, चित्रा सखी मंदिर के सामने वाली गली में चिकसौली रूपनगर रोड पर स्थित है। यहाँ बिछुआ कुंड नामक एक छोटा सा कुंड भी है, जो इस स्थान के शांत और पवित्र वातावरण को और भी बढ़ा देता है।

  6. श्रीकुण्डाश्रयवन्तमन्तरल - श्रीगोवर्द्धन भट्ट, श्री राधाकुण्ड स्तव (45)

    जो अत्यन्त आदर से हृदय में प्रेमोल्लास के साथ श्री राधाकुंड का आश्रय करता है वह परम भाग्यवान्‌ है । ब्रह्मादी लोकपाल देवतागण भी निज अभिमान को छोड़ कर उसको प्रणाम करते हैं । अधिक क्या कहूँ व्रजराज नंदन (श्री कृष्ण) के मस्तक पर अपने चरणों का महावर लगाने वाली श्रीराधिका को भी कुंडवासी अपने वश में कर लेता है ।

  7. सदा सदा राजत जहाँ सघन लतन के झुंड - श्रीराधा प्रिया जी (राधिकानाथ जी)

    गिरिराज गोवर्धन की पावन तलहटी में श्रीराधाकुंड अत्यंत सुशोभित है, जहाँ सघन लताओं के कुंज और वन-वाटिकाएँ सदैव अपनी छटा बिखेरती रहती हैं।

  8. श्रीकुण्डे संततं यो निवसति - श्रीगोवर्द्धन भट्ट, श्री राधाकुण्ड स्तव (100)

    श्रीराधाकुंड में जो पुरुष निरन्तर वास करता हैं, देवता- पितृ तथा मुनिवरों का समूह उसका कुछ भी कर सकने में समर्थ नहीं होते हैं। ब्रजराजनन्दन श्रीकृष्ण भी औरों की सेवा में उसको नहीं जाने देते हैं । केवल अपने निज जनों के साथ अपनी प्रियतमा श्रीराधिका किशोरी की सेवा में ही उसे नियुक्त करते हैं ।

  9. कृष्णराधिका कुंड को, ह्वैहों कबहूँ नीर - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (54)

    मेरी यह अभिलाषा है कि क्या मैं कभी श्री राधा-कृष्ण के पवित्र कुंडों (श्री राधाकुण्ड और श्री श्यामकुण्ड) का जल बन सकूँगा? जब वे युगल किशोर अपने श्यामल और गौर वर्ण के श्री अंगों से उस जल में जल-क्रीड़ा (केलि-कलोल) करेंगे, तब मुझे उनके स्पर्श का परम सुख प्राप्त होगा।

  10. श्री हित रूपलाल जी की जीवनी

    1681 ई. के वैशाख कृ० 7 को श्रीहित हरिवंशजी महाराज के कुल में गोस्वामी श्रीरूप लालजी का जन्म हुआ। इनके पिता गोस्वामी श्रीहरिलालजी तथा माता श्रीकृष्णकुँवरि थीं।

  11. हे श्रीसरोवर सदा त्वयि - श्री रघुनाथ दास गोस्वामी, विलाप कुसुमांजलि (98)

    हे श्रीराधाकुण्ड मेरी स्वामिनी श्रीराधा जी अपने प्रियतम श्रीश्यामसुन्दर के साथ आपके तटवर्ती कुञ्ज में प्रेमोद्रेक में विविध क्रीड़ाएं करती रहती हैं। हे राधाकुण्ड ! आप उन युगलकिशोर के प्रिय से भी अधिक प्रियतम हैं। अतएव कृपा करके मेरी जीवनस्वरूपा स्वामिनी श्रीराधा के आज ही दर्शन करा दो ।

  12. श्री वृषभानु कुण्ड, बरसना (जल महल)

    वृषभानु कुण्ड, बरसना में स्थित है । यहाँ महाराज वृषभानु जी नित्य स्नानोपरान्त, ब्रजेश्वर महादेव की उपासना के लिए जाते थे, इसे भानोखर भी कहते हैं।

  13. पोतरा कुण्ड, मथुरा

    पोतरा कुण्ड मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि के पास ही करीब 50 मीटर की दुरी पर स्थित है।

  14. कुँवरि राधिका तुम सकल सौभाग्य सींवा - श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (159)

    श्री कुम्भनदास कहते हैं "हे कुँवरि राधिका जू, आप समस्त सौभाग्य की सीमा हो, आपके इस स्वरुप पर मैं करोड़ों करोड़ों चंद्रमाओं को न्योछावर कर दूँ। मेरे मन में यह विचार भी आ रहा है की आपके नयन कमलों पर करोड़ों करोड़ों खंजन पक्षी तथा मृगों को न्योछावर कर दूँ, जिनके नेत्र विश्व में सबसे सुन्दर माने गए हैं।"

  15. विमल कुंड, काम्यवन, ब्रज

    यहाँ श्री कृष्ण के साथ रास लीला खेलते हुए राजा विमल की पुत्रियों के प्रेमपूर्ण आँसुओं से इस कुंड का निर्माण हुआ है। भविष्य पुराण के अनुसार, श्री कृष्ण के साथ रहने की राजा विमल की पुत्रियों की प्रबल इच्छा इस स्थान पर पूरी हुई और इसीलिए इस कुंड को विमल कुंड कहा जाता है।

  16. अन्तरीयगसुरत्नमण्डपे स्वीयकुण्डमनु - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (5.3)

    अपने निज कुण्ड के निकुट अन्तरंग सुन्दर रत्नमण्डप में सखिवृन्द के साथ श्रीवृषभानुनन्दिनी श्रीश्यामसुन्दर के सहित गान-कौतुक कर रही हैं-ऐसी छवि मेरे चित्त में स्फुरित हो।

  17. श्रीगान्धर्वासम्प्रार्थनाष्टकम् - श्री रूप गोस्वामी

    हे राधिके! मुझ पर कृपा कर अपना मुख कमल मेरे समक्ष ऐसे प्रकट करें, जब आप और श्री कृष्ण, मद गज के समान प्रेम में लीन वृन्दावन के कुंजो में विहार करते हैं।