जो बोले तो हरि-कथा नहीं - श्री चरणदास, भक्ति सागर
भक्ति-मार्ग के साधक की रहनी का वर्णन करते हुए श्री चरणदास जी कहते हैं कि यदि मुख से कुछ बोले, तो केवल श्रीहरि-कथा ही बोले; अन्यथा शांत रहकर मौन धारण करे। आवश्यकता पड़ने पर ही आवश्यक बात कहे, अन्यथा भूलकर भी कभी मिथ्या, कड़वे या दुर्वचन न बोले।
