भक्ति सागर

भक्ति सागर ग्रन्थ भक्ति का सागर है, जिसमें योग, आसन, सिद्धि, कृष्ण की दिव्य लीलाएं, उपनिषद आदि के श्लोक सम्मिलित हैं जिनका वर्णन श्री चरणदास जी ने किया है, जो ऋषि श्री शुकदेव जी के शिष्य हैं।

23 लेख उपलब्ध हैं

  1. जो बोले तो हरि-कथा नहीं - श्री चरणदास, भक्ति सागर

    भक्ति-मार्ग के साधक की रहनी का वर्णन करते हुए श्री चरणदास जी कहते हैं कि यदि मुख से कुछ बोले, तो केवल श्रीहरि-कथा ही बोले; अन्यथा शांत रहकर मौन धारण करे। आवश्यकता पड़ने पर ही आवश्यक बात कहे, अन्यथा भूलकर भी कभी मिथ्या, कड़वे या दुर्वचन न बोले।

  2. मुकुट पर वारी रे नागरनन्दा - श्री चरणदास

    नन्दनन्दन, श्री कृष्ण के मुकुट की शोभा पर न्योछावर हूँ। समस्त सखियों के बीच श्री हरि इस प्रकार सुशोभित हो रहे हैं, जैसे नक्षत्रों के मध्य चन्द्रमा विराजमान हों।

  3. वृन्दावन सबसौं बड़ो यथा दूध में घीव - श्री चरणदास

    जैसे दूध का सार तत्व घी होता है, वैसे ही समस्त धामों में वृन्दावन परम श्रेष्ठ है। जैसे सम्पूर्ण देह का आधार प्राण है, वैसे ही सब धर्मों का सार, मूल और प्राण स्वरूप तत्त्व हरि-भक्ति ही है।

  4. श्री स्वामी हरिदास जी रसिक महा हरिव्यास - श्री चरण दास

    श्रीस्वामी हरिदास जी, हरिव्यास जी, श्रीकृष्णदास, एवं श्रीहित अलि (हरिवंश महाप्रभु) — ये सभी महान रसिक आचार्य हैं। इनके दिखाए हुए मार्ग में ही सुखों का सागर है।

  5. कंचन की यह भूमि है - श्री चरणदास, भक्ति सागर

    श्रीधाम वृंदावन की यह भूमि स्वर्ण जैसी है, जिसने सतोगुण रूपी आभूषण धारण कर रखा है। श्री चरणदास बार बार बलिहारी जा रहे हैं, जिसे केवल दिव्य दृष्टि से ही निहारा जा सकता है।

  6. नाम राधिका श्याम भज राधावल्लभ गाय - श्री चरण दास

    दिव्य दंपति श्री राधिका-श्याम के नाम का भजन करो और उनके गुणों का गान करो। महाप्रसाद (जो युगल को अर्पित किया गया हो) के प्रति ऐसी अटल निष्ठा रखो कि उसके बिना कुछ भी न खाओ।

  7. श्री बरसाने जो बसत तिन्हें बंधु निज जान - श्री चरण दास

    जो श्री बरसाना धाम में वास करते हैं उन्हें अपना निज बंधु जानना चाहिए। तुम्हारे किशोरीजी (श्री राधा) के नाते के कारण ही, उनसे नाता जोड़कर यथा शक्ति से उसे निभाना चाहिए ।

  8. भूमि जानि व्रज भूमि निज मंत्र श्री राधे श्याम - श्री चरण दास

    व्रजभूमि को ही निज अपनी भूमि मानो, और मंत्र "श्री राधे श्याम" का निरंतर जप करो । इसे परम पावन गायत्री मानो क्योंकि यह समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है ।

  9. पंच उपास में हैं नहीं - श्री चरण दास, भक्तिसागर

    युगल किशोर श्री श्यामाश्याम शास्त्रों में वर्णित पाँच देवों की उपासना से परे हैं। ये तो रसिकों के परम धन हैं, जो उनके ह्रदय में स्थित अति गोपनीय हैं।

  10. अवतारी अवतार नहिं ये दोऊ नित्य किसोर - श्री चरण दास, भक्तिसागर

    श्री वृंदावन धाम में अखंड नित्य विहार परायण श्री बिहारी बिहारिनी अवतार लीला से परे हैं, जो सदा नित्य किशोर रहते हैं एवं विहार में ऐसे उन्मत्त हैं कि दिन और रात भी नहीं जानते ।

  11. निज वृन्दावन देखिया - श्री चरण दास, भक्तिसागर

    उस दिव्य निज वृंदावन धाम का इन्हीं आँखों से अवलोकन किया है, जहाँ नित्य अखंड रास होता है। जहां पिय प्यारी नित्य विहार करते हैं, उसी दिव्य स्थल पर उनकी कृपा से यह दास भी पहुँच सका है।

  12. गौरीसुत नहिं गा सकै, नहीं शारदा वाम - श्री चरण दास, भक्तिसागर

    प्रिया-प्रियतम के निज धाम वृंदावन की महिमा का वर्णन गणेश जी एवं ब्रह्मा जी भी नहीं कर सकते, तो भला ऐसा कौन-सा बुद्धिजीवी है जो श्री वृंदावन धाम का वर्णन करने में समर्थ हो (अर्थात् कोई नहीं)।