श्री चरण दास (शुक संप्रदाय)

श्री चरण दास वृंदावन धाम के एक रसिक संत हैं जिन्होंने रसोपासना में शुक संप्रदाय की स्थापना की।

30 लेख उपलब्ध हैं

  1. जो बोले तो हरि-कथा नहीं - श्री चरणदास, भक्ति सागर

    भक्ति-मार्ग के साधक की रहनी का वर्णन करते हुए श्री चरणदास जी कहते हैं कि यदि मुख से कुछ बोले, तो केवल श्रीहरि-कथा ही बोले; अन्यथा शांत रहकर मौन धारण करे। आवश्यकता पड़ने पर ही आवश्यक बात कहे, अन्यथा भूलकर भी कभी मिथ्या, कड़वे या दुर्वचन न बोले।

  2. सेवाकुंज सो कुँज निज सम्पति दम्पति सेव - श्री चरणदास

    यह सेवाकुंज ही हमारा परम निज-धाम कुंज है, जहाँ निरंतर श्री प्रिया-प्रियतम की सेवा करना ही हमारा परम लक्ष्य है। यह सेवा ‘तत्सुख-सुख’ के भाव से की जाती है—अर्थात् प्रिया-प्रियतम के सुख में ही अपना सुख मानना है। यही भाव अत्यंत उज्ज्वल और सर्वदा सरस है। हमारा गोत्र ‘अच्युत’ है—अर्थात् हमारा सर्वस्व श्रीकृष्ण से ही सम्बन्धित है।

  3. मुकुट पर वारी रे नागरनन्दा - श्री चरणदास

    नन्दनन्दन, श्री कृष्ण के मुकुट की शोभा पर न्योछावर हूँ। समस्त सखियों के बीच श्री हरि इस प्रकार सुशोभित हो रहे हैं, जैसे नक्षत्रों के मध्य चन्द्रमा विराजमान हों।

  4. जीवन मुक्तन को जहां है नाहीं अधिकार - श्री चरणदास

    श्री चरणदास जी कहते हैं कि जहाँ उन महापुरुषों को भी प्रवेश का अधिकार नहीं है जो जीवन-मुक्त हैं, उस परम गोपनीय निकुंज धाम में श्री शुकदेव जी सखी स्वरूप धारण कर, श्री राधा-कृष्ण के उस 'नित्य विहार' रस का निरंतर अवलोकन करती रहती हैं।

  5. वृन्दावन सबसौं बड़ो यथा दूध में घीव - श्री चरणदास

    जैसे दूध का सार तत्व घी होता है, वैसे ही समस्त धामों में वृन्दावन परम श्रेष्ठ है। जैसे सम्पूर्ण देह का आधार प्राण है, वैसे ही सब धर्मों का सार, मूल और प्राण स्वरूप तत्त्व हरि-भक्ति ही है।

  6. श्री स्वामी हरिदास जी रसिक महा हरिव्यास - श्री चरण दास

    श्रीस्वामी हरिदास जी, हरिव्यास जी, श्रीकृष्णदास, एवं श्रीहित अलि (हरिवंश महाप्रभु) — ये सभी महान रसिक आचार्य हैं। इनके दिखाए हुए मार्ग में ही सुखों का सागर है।

  7. कंचन की यह भूमि है - श्री चरणदास, भक्ति सागर

    श्रीधाम वृंदावन की यह भूमि स्वर्ण जैसी है, जिसने सतोगुण रूपी आभूषण धारण कर रखा है। श्री चरणदास बार बार बलिहारी जा रहे हैं, जिसे केवल दिव्य दृष्टि से ही निहारा जा सकता है।

  8. आय सकत नहिं गिरा में संप्रदाय मम रीत - श्री चरण दास

    मेरे संप्रदाय की रीति का पूर्ण वर्णन वाणी से कर पाना संभव नहीं। इसे प्रेम-सम्प्रदाय कहते हैं, इसकी कुछ अनुभूति और अभिव्यक्ति भी केवल प्रेम के माध्यम से ही संभव है।

  9. नाम राधिका श्याम भज राधावल्लभ गाय - श्री चरण दास

    दिव्य दंपति श्री राधिका-श्याम के नाम का भजन करो और उनके गुणों का गान करो। महाप्रसाद (जो युगल को अर्पित किया गया हो) के प्रति ऐसी अटल निष्ठा रखो कि उसके बिना कुछ भी न खाओ।

  10. श्री बरसाने जो बसत तिन्हें बंधु निज जान - श्री चरण दास

    जो श्री बरसाना धाम में वास करते हैं उन्हें अपना निज बंधु जानना चाहिए। तुम्हारे किशोरीजी (श्री राधा) के नाते के कारण ही, उनसे नाता जोड़कर यथा शक्ति से उसे निभाना चाहिए ।

  11. भूमि जानि व्रज भूमि निज मंत्र श्री राधे श्याम - श्री चरण दास

    व्रजभूमि को ही निज अपनी भूमि मानो, और मंत्र "श्री राधे श्याम" का निरंतर जप करो । इसे परम पावन गायत्री मानो क्योंकि यह समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है ।

  12. पंच उपास में हैं नहीं - श्री चरण दास, भक्तिसागर

    युगल किशोर श्री श्यामाश्याम शास्त्रों में वर्णित पाँच देवों की उपासना से परे हैं। ये तो रसिकों के परम धन हैं, जो उनके ह्रदय में स्थित अति गोपनीय हैं।