श्री हठी जी के सवैया

वृंदावन के रसिक श्री हठी जी द्वारा लिखित भक्ति सम्बंधित सवैया।

12 लेख उपलब्ध हैं

  1. ब्रज की बलि आजु निकुञ्जन - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (80)

    आज निकुंजों में ब्रज के प्राण-सर्वस्व असीम सुख की वर्षा कर रहे हैं, जहाँ प्रियतम श्रीकृष्ण अपनी लाड़ली श्रीराधा के आलस्य से युक्त मुखचंद्र को निहारकर परम आनंद प्राप्त कर रहे हैं।

  2. लीने लली ललतादिक संग उमंग - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (61)

    श्री वृषभानु-दुलारी श्रीराधा अपनी ललिता आदि सखियों के संग अत्यंत उमंग के साथ सुंदर फुलवारी में पधारी हैं जहाँ मालती, कुंद, निवारी तथा गुलाब आदि विविध पुष्पों से सुसज्जित फुलवारी चारों ओर अपनी सुगंध बिखेर रही है।

  3. हेलीरी तैं लखे आजु के ख्याल - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (34)

    हे सखी! क्या तूने आज प्रिया-प्रियतम के उस अनूठे और कौतुकभरे विलास को देखा? मेरी बुद्धि इतनी सामर्थ्यवान नहीं कि मैं उसका पूरी तरह से बखान कर सकूँ। आज हमारी प्यारी श्री राधा जी के शीश पर मोरपंख सुशोभित है, और उनके हाथों में वंशी तथा लकुटी (लाठी) है, एवं उनकी कमर में पीताम्बर की डोरी बंधी हुई है (अर्थात् श्री राधा ने श्री कृष्ण का भेष धारण किया है)।

  4. रम्भा रमासी उमासी हठी विमला नवला - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (83)

    रम्भा, लक्ष्मीजी, पार्वतीजी, विमला, नवला, और रति (कामदेव की पत्नी) सभी श्री राधा के रूप-सौंदर्य को निहारकर मानो छली हुई सी स्तब्ध खड़ी रह जाती हैं।

  5. कर कंजन जावक दै रूचि सौं - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (6)

    प्रेम में पूर्णतया आसक्त होकर श्री कृष्ण अपने हाथों से श्री राधा के चरण कमलों में जावक लगाते हैं। ब्रज की प्यारी ठकुरानी, श्री राधा के कमल जैसे चरणों को सुंदर बिछुओं से सुसज्जित करते हैं।

  6. मोरपखा गर गुन्ज की माल - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (35)

    श्री राधा रानी ने आज स्वयं के लिए एक नवीन और अति सुन्दर रूप बनाया है। सिर पर मोर मुकुट और गले में गुंजा माला धारण की है। उनकी छवि बहुत प्यारी है।

  7. नवनीत गुलाब से कोमल हैं - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (49)

    श्री राधा मक्खन की तुलना में अधिक कोमल और गुलाब की पंखुड़ियों से अधिक मुलायम हैं। जैसा कि श्री हठी जी कहते हैं, उनकी सुंदरता कमल के फूल से भी अधिक है।