श्री संकेत अलि

श्री संकेत अलि जी श्री वंशी अली जी द्वारा स्थापित ललित संप्रदाय के रसिक भक्त थे ।

12 लेख उपलब्ध हैं

  1. सखी सुनु बरषैगो रस-मेह राधाकृष्ण - श्री संकेत अली, संकेत लता, विवाह प्रकर्ण(1)

    हे सखी! सुनो, अब प्रेम-रस की वर्षा होने वाली है। मैं अभी उनके घर से यह बात सुनकर आई हूँ कि हमारे प्यारे श्री राधा-कृष्ण का परस्पर मंगलमय विवाह होने वाला है।

  2. चलु मन श्री वृन्दावन ओर - श्री संकेत अलि, संकेत लता (827)

    हे मन! व्यर्थ भटकने का क्या लाभ? चलो — ब्रजभूमि की ओर, जो संपूर्ण शांति और आनंद का धाम है। वृंदावन, मथुरा, महावन, बरसाना और नंदगाँव — ये सब परमपावन स्थलों की ओर चलो।

  3. काहू की मानत न प्रिय लालन चित्त उदास - श्री संकेत अली, संकेत लता (657)

    जब किशोरीजी मान करके बैठीं और किसी के भी मनाने पर नहीं मानीं, तब श्री कृष्ण का मन उदास हो गया। यह सोचते हुए कि — अब मान कैसे समाप्त होगा, अंत में श्री कृष्ण सहायता के लिए श्री ललिता जी के पास गए।

  4. चलु मन श्री वृन्दावन ओर - श्री संकेत अली, संकेत लता

    हे मन! उस परम दिव्य वृन्दावनधाम की ओर चलो जो अद्वितीय है, और समस्त दिव्य कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। वहाँ युगल किशोर श्रीराधा-कृष्ण सदा नित्य विहार करते हैं।

  5. गति गरवीली देखि के मानत मन में लाज - श्री संकेत अली, संकेत लता (92)

    श्री राधारानी की अति मनोहर, अति गर्वीली चाल को देखकर गजराज (हाथियों का राजा) भी अपने भीतर लज्जित हो उठता है। इतना विनीत हो जाता है कि वह झुककर श्री राधा जी के चरणों की धूल को लेकर अपने मस्तक पर डालता है और समस्त अभिमान त्याग कर वृंदावन की महारानी का आदर करता है।

  6. बंशीअलि हरिदास जी, हित हरिबंश समेत - श्री संकेत अली, संकेत लता (5)

    मैं श्री वंशी अलि जी समेत स्वामी श्री हरिदासजी और श्री हित हरिवंशजी के चरणों में विनम्रतापूर्वक प्रणाम कर, उनके चरणों की पावन रज को अपने मस्तक पर धारण करता हूँ तथा उनकी कृपा की याचना करता हूँ।

  7. सुनी श्रुति तुमही अशरण शरण - श्री संकेत अलि, संकेतलता

    हे श्री राधे, शास्त्रों के अनुसार, केवल आप ही आश्रयहीनों की एक मात्र आश्रय हैं। हे मनोहर सर्वसमर्थ स्वामिनी श्री राधिके! कृपया मेरी विनती को सुनिए ।