अब ना बनी तो फिर - श्री पुरुषोत्तम जी
यदि इस मानव जीवन में अपना कल्याण न कर पाए तो फिर कभी नहीं हो सकेगा, क्योंकि यह मनुष्य शरीर बार-बार नहीं मिलता और न ही माता बार-बार इसे जन्म देगी; यदि यह अवसर चूक गए तो पुनः चौरासी लाख योनियों के चक्र में गिरना पड़ेगा और यमराज के दंड से तुम्हारा संघर्ष होता रहेगा।
