29 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं

  1. श्री राधाप्यारी सुकुमारी - श्री सरस माधुरी जी

    श्री कृष्ण कहते हैं — हे श्रीराधाप्यारी! हे सुकुमारी! आपकी मनोहर छवि पर मैं न्योछावर जाऊँ। मैं अपने अधरों पर बंसी धारण कर, तुम्हारे ही गुणों का गान करता हूँ।

  2. जाकी कृपा सों नित्य दिव्य ब्रजमंडल माँहि - श्री गिरिराज गोस्वामी 'अनन्त' (गोकुल)

    जिनके श्री चरणों की कृपा से मनुष्य नित्य दिव्य ब्रज धाम वास करता हूँ, रमण-बिहारी एवं बिहारिणी की अंतरंग लीलाओं का अवलोकन करता है।

  3. जब जब मुरली कान्ह बजावत - श्री सूरदास, सूर सागर

    श्री सूरदास सखी भाव धारण कर श्री राधा से कहते हैं - जब-जब श्रीकृष्ण मुरली बजाते हैं, तब-तब वह “राधा” नाम का बार-बार उच्चारण कर आपको रिझाने का प्रयत्न करते हैं।

  4. व्यास राधिका-रवन बिनु - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (31)

    श्री राधिका रमण युगल सरकार, जो सबके मूल स्रोत हैं, उनके बिना मुझे कहीं भी सच्चा आनंद प्राप्त नहीं हुआ। संसार की प्रत्येक डाल-डाल पर भटकते-भटकते मैं उलझ गया और हर पत्ते ने मुझे केवल दुःख ही दिया।

  5. श्री गुणमंजरीदास (श्री गल्लू गोस्वामी) जी की जीवनी

    माध्वगौड़ेश्वराचार्य परम सन्त पूज्य पाद गोस्वामी श्री गल्लू जी महाराज के पिता का नाम श्रीरमण दयालजी महाराज था । श्री गल्लू जी महाराज का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी सन् 1827 में हुआ था । इनके एकमात्र पुत्र श्रीराधाचरण गोस्वामी जी हुये । श्रीराधाचरण जी की माँ का नाम श्रीमती सूर्यादेवी गोस्वामी था ।

  6. ललित कुंज, वृंदावन

    ललित कुंज वृंदावन में स्थित है जो श्री वंशी अली जी की भजन स्थली एवं समाधी स्थली है । यहीं श्री वंशी अली जी भजन करते थे एवं अपने आराध्य श्री किशोरी रमण जी की सेवा करते थे ।

  7. ताज बीबी की समाधि, गोकुल महावन

    ताज बीबी श्री कृष्ण की परम भक्त थीं । इनका जन्म 17वीं शताब्दी में हुआ था । ताज बीबी के पिता का नाम पद्न खान था । ताज बीबी का विवाह बादशाह अकबर के साथ हुआ था ।

  8. रमणरेती, गोकुल, ब्रज

    एक बार मुनि दुर्वासा भगवान् श्रीकृष्ण के दर्शन हेतु ब्रजभूमि में पधारे। रमणरेती में उन्होंने देखा परम चित्ताकर्षक बाल गोपाल अपने साथी गोप-बालकों के साथ वहाँ रज में लोटते, परस्पर विभिन्न प्रकार की बाल क्रीड़ाएँ कर रहे थे।

  9. श्री वंशी अलि जी की जीवनी

    श्री नाभा दास जी ने भक्तमाल ग्रंथ में श्रीमद्भागवत के महा पंडित श्री नारायण मिश्र जी का एक छप्पय में चरित्र गान किया है। यह नवला वंश के सारस्वत ब्राह्मण थे। श्रीमद्भागवत के मनन चिंतन से सहज ही ब्रज धाम के प्रति अनुराग उत्पन्न हो गया और ब्रज वास की इच्छा से मथुरा पधारें।

  10. जय राधे जय कृष्ण जय वृंदावन - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी (1.91)

    जय राधे जय कृष्ण जय वृंदावन, रसिक मुकुट मणि जय गोपीजन । राधे राधे रटें श्याम, राधे रटे श्याम श्याम, राधे श्याम युगल नाम, मेरो है जीवन ।।

  11. प्यारी कुंज, वृंदावन

    प्यारी कुंज निम्बार्क परंपरा से समन्धित श्री राधा कृष्ण की कुंज है। महावाणी समाज गायन यहाँ नियमित रूप से होता है।