राग पीलू

राग पीलू काफी थाट से सम्बंधित है। इस राग का भाव सूक्ष्म है और इसलिए यह राग ठुमरी और भजनों के लिए उपयुक्त है। यह राग भक्ति से परिपूर्ण है। राग पीलू दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक गाया जाता है।

12 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. देहु निकुंज निवास स्वामिनी - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (06)

    हे स्वामिनी! मेरी समस्त भूल-चूक और दोषों को त्यागकर, अपनी ओर (अपनी कृपा की ओर) देखते हुए मुझे निकुंज में वास प्रदान कीजिए। मैंने तीनों लोकों में तुम्हारी जोड़ी (अर्थात् श्री राधा-कृष्ण) के समान ऐसी ललित और मनोहारी जोड़ी न तो कभी सुनी है और न ही देखी है।

  2. श्यामा अब तो रह्यौ न जाय - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (50)

    हे श्यामा (राधा), अब मैं आपके बिना एक पल भी नहीं रह सकता। आपकी याद मुझे हर क्षण सताती रहती है एवं आपकी नित्य स्थली सेवाकुंज मेरे हृदय को अत्यंत मनोहर लगती है।

  3. सखि नँदलाल न आवन पावै - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, सम्भ्रम-मानलीला (5)

    श्री राधारानी सखी से कहतीं हैं कि हे सखी, देखना नन्दलाल (श्री कृष्ण) आने न पायें । चाहे जितना तुम्हें अनुनय-विनय करें लेकिन मेरे महल के भीतर चरण रखने नहीं देना ।

  4. किशोरी सुन्दरी श्यामा तू ही सरकार मेरी है - श्री सरस माधुरी जी

    हे किशोरी श्री राधा, हे सुंदरी श्यामा, तुम ही एक मात्र मेरी सरकार हो । मुझे अन्य किसी से कोई मतलब नहीं है, केवल एक तुम्हारी ही मुझे आस है ।

  5. लाड़िली ! कब मोहि अपनाओगी - श्री किशोरी अलि जी

    श्री किशोरी अली जी श्री राधा से प्रार्थना करते हैं "हे लाड़िली ! मुझे कब अपनी सेवा का सुख प्रदान करोगी। अपना हस्त कमल मेरे मस्तक पर रखकर मुझे कब श्री वृन्दावन का वास प्रदान करोगी।"

  6. भाग्यवान वृषभानुसुता सी को तिय त्रिभुवन माहीं - श्री हरिराय जी

    संसार में श्रीराधा जैसी भाग्यवान कोई स्त्री नहीं है। जिनके पति तीनों लोकों के स्वामी श्रीकृष्ण सदैव उनके कन्धे पर गलबहियां डाले रहते हैं।