छिन-छिन हैं नव लाड़ली करिये - श्री हित गोपाल दास, निकुंज रस वल्लरी, आशीष दोहा
क्षण-क्षण नित्य नवीन रहने वाली श्री लाड़ली जी और प्रियतम श्यामसुन्दर निरंतर दिव्य रास-क्रीड़ा का विलास करते रहें। आप दोनों का यह परम निर्मल और श्रेष्ठ प्रेम नित्य नवीन भाव से दिव्य रस और आनंद से सदैव परिपूर्ण बना रहे।
