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17 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं
पवित्रा शोभित पाट पुनीत - श्री हित किशोरी लाल
शुद्ध रेशम का बना हुआ पवित्रा श्री श्यामाश्याम के गले में सुशोभित है।प्रिया के हृदय पर लाल और सोसनी (लाल रंग मिले हुये नीले रंग का) रंगों का पवित्रा धारण किया हुआ है और मोहन के वक्ष स्थल पर पीला पवित्रा धारण हैं।
श्री राधिका माधव छवी अपार - श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी), हरि लीला (18)
श्री राधिका-माधव की शोभा बड़ी ही अद्भुत एवं अलौकिक है। सखियाँ प्रेमपूर्वक उनका श्रृंगार कर आरती कर रही हैं।
जाकी कृपा सों नित्य दिव्य ब्रजमंडल माँहि - श्री गिरिराज गोस्वामी 'अनन्त' (गोकुल)
जिनके श्री चरणों की कृपा से मनुष्य नित्य दिव्य ब्रज धाम वास करता हूँ, रमण-बिहारी एवं बिहारिणी की अंतरंग लीलाओं का अवलोकन करता है।
आरति करत श्री ललित कुँवरि की - श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (115)
श्री ललिता आदि सखियाँ मनोहारिणी कुँवरि श्री राधा की आरती कर रही हैं, जिनके रूप-सौंदर्य की आभा करोड़ों सूर्य के समान उज्ज्वल है।
सारंग नैनी सारंग गावे - श्री चतुर्भुजदास जी
सारंग जैसे नेत्रों वाली मृगनयनी श्री राधा, मधुर राग सारंग गा रही हैं। अत्यंत मनमोहक साड़ी धारण कर, वे मधुर-मधुर सुर से वीणा वादन कर रही हैं ।
छबि निधि बिहरत प्रीतम प्यारी - श्री किशोरी अलि
सुंदरता की निधि, श्री प्रीतम प्यारी (श्री राधा कृष्ण), वृंदावन में विचरण कर रहे हैं। वे सघन बादलों से बरसते हुए जल और वृंदावन के हरे-भरे वनों को निहार रहे हैं।
ब्रज में हरि होरी मचाई - श्री सूरदास, सूर सागर
आज श्री कृष्ण ने ब्रज में होली मचाई है। एक ओर से सुंदरता की खान श्री राधिका आईं और दूसरी ओर से कुंवर कन्हैया श्री कृष्ण आये ।
प्रियालाल खेलत बसंतर - श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (51)
प्रियाप्रियतम फाग खेल रहे हैं। झाँझ, मृदंग, डफ, वंशी, वीणा और मुहचंग सुन्दर सुरीली तान में बज रहे हैं ।
गोस्वामी श्री हित राधालाल जी की जीवनी
गो. श्रीराधालाल जी का जन्म 1885 की आश्विन बदी तृतीया के दिन वृन्दावन में हुआ था। इनके पिता गो. श्रीगोवर्द्धनलाल जी श्रीराधावल्लभ मन्दिर के रासवंशीय सेवाधिकारी थे।
जमुना कूल कदम की छंहियां - श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विहार पदावली (32)
श्री वृंदावन धाम में यमुना के किनारे, कदंब वृक्ष की छाया में, दोनों लाड़ली लाल [श्री राधा कृष्ण] गलबहियां दिये बैठे हैं ।
शिव शंकर छोड़ दियो डमरू - श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’
शिव ने अपना डमरू त्याग दिया और सरस्वती अपनी वीणा छोड़कर भाग गईं; इस दिव्य ध्वनि ने पाताल एवं नभ में अपनी गूंज कर दी, ऋषि नारद के सिर पर यह गरजने लगी।
प्रातहिं मंगल आरति कीजै - श्री हित रूपलाल जी
प्रातः काल में ही श्री जुगल किशोर की मंगल आरती कीजिये जिनके अंग रूप एवं रस से छके हुए हैं । ऐसी अद्भुत छवि को अपने नेत्रों में सदा के लिए भर लीजिये ।
ललित नवकुंज में होरी पिया संग खेलती गोरी - श्री राधा प्रसाद देव जू
रमणीय कुजमहल में प्रियतम के संग प्रियाजी होली खेल रही हैं। बाँसुरी, वीणा, डफ आदि वाद्य सप्त स्वरों को साधकर बज रहे हैं ।
नव निकुंज मंदिर में प्यारी - श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (30)
नव निकुंज मन्दिर में श्री प्रियाजी (राधा) अपने प्रियतम (कृष्ण) को वीणा वादन की शिक्षा दे रही हैं ।
श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी का चरित्र
राधावल्लभ संप्रदाय के गोस्वामी श्री हित रूपलाल जी ने अपने सहचरी वपु से श्री श्यामा श्याम की एक लीला का दर्शन किया, जिसे वे स्वयं वर्णन कर रहे हैं
रसिक दोऊ मंडल रास रचावैं - श्री किशोरी अलि जी
दो रसिक जन रास मंडल में रास रचा रहे हैं । चारों ओर सखी जन झूम रही हैं और वीणा एवं मृदंग बजा रही हैं ।
नव निकुंज ग्रह नवल आगैं - श्री स्वामी हरिदास जी, केलिमाल (106)
नवल निकुंज में नवल प्रियतम के समक्ष नवल वीना लिए श्री प्यारी जू [श्री राधा] ने गौरी राग का वादन आरम्भ किया । प्रिया पिय से बोलीं- जैसा मैं सिखा रही हूँ, वैसी वीणा बजायें। वीणा के मध्य राग गौरी की थाट छेड़ी।