17 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं

  1. पवित्रा शोभित पाट पुनीत - श्री हित किशोरी लाल

    शुद्ध रेशम का बना हुआ पवित्रा श्री श्यामाश्याम के गले में सुशोभित है।प्रिया के हृदय पर लाल और सोसनी (लाल रंग मिले हुये नीले रंग का) रंगों का पवित्रा धारण किया हुआ है और मोहन के वक्ष स्थल पर पीला पवित्रा धारण हैं।

  2. जाकी कृपा सों नित्य दिव्य ब्रजमंडल माँहि - श्री गिरिराज गोस्वामी 'अनन्त' (गोकुल)

    जिनके श्री चरणों की कृपा से मनुष्य नित्य दिव्य ब्रज धाम वास करता हूँ, रमण-बिहारी एवं बिहारिणी की अंतरंग लीलाओं का अवलोकन करता है।

  3. छबि निधि बिहरत प्रीतम प्यारी - श्री किशोरी अलि

    सुंदरता की निधि, श्री प्रीतम प्यारी (श्री राधा कृष्ण), वृंदावन में विचरण कर रहे हैं। वे सघन बादलों से बरसते हुए जल और वृंदावन के हरे-भरे वनों को निहार रहे हैं।

  4. गोस्वामी श्री हित राधालाल जी की जीवनी

    गो. श्रीराधालाल जी का जन्म 1885 की आश्विन बदी तृतीया के दिन वृन्दावन में हुआ था। इनके पिता गो. श्रीगोवर्द्धनलाल जी श्रीराधावल्लभ मन्दिर के रासवंशीय सेवाधिकारी थे।

  5. शिव शंकर छोड़ दियो डमरू - श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’

    शिव ने अपना डमरू त्याग दिया और सरस्वती अपनी वीणा छोड़कर भाग गईं; इस दिव्य ध्वनि ने पाताल एवं नभ में अपनी गूंज कर दी, ऋषि नारद के सिर पर यह गरजने लगी।

  6. नव निकुंज ग्रह नवल आगैं - श्री स्वामी हरिदास जी, केलिमाल (106)

    नवल निकुंज में नवल प्रियतम के समक्ष नवल वीना लिए श्री प्यारी जू [श्री राधा] ने गौरी राग का वादन आरम्भ किया । प्रिया पिय से बोलीं- जैसा मैं सिखा रही हूँ, वैसी वीणा बजायें। वीणा के मध्य राग गौरी की थाट छेड़ी।