श्री चतुर्भुज दास

श्री चतुर्भुज दास पुष्टिमार्ग या वल्लभ सम्प्रदाय के अष्टछाप कवि थे।

18 लेख उपलब्ध हैं

  1. वत्सलता अरु अभय सदा आरत-अघ-सोखन - श्री चतुर्भुजदास जी

    श्री कृष्ण के गुणों का वर्णन करते हुए श्री चतुर्भुज दास कहते हैं कि वे सदैव वात्सल्य और करुणा से परिपूर्ण रहते हैं तथा अपने शरणागत को निर्भयता प्रदान करते हैं। वे पापों का नाश करने वाले, दीनों के सच्चे मित्र तथा सुख के अथाह सागर हैं। वे समस्त सुखों के दाता हैं और दुःखों का निवारण करने वाले हैं।

  2. आजु सखी तोहिं लागी इहै रट - श्री चतुर्भुज दास

    हे सखी! आज तो तुझे बस यही एक रट लग गई है। तू वृन्दावन के सीधे-टेढ़े और दुर्गम वीथियों में भटकती हुई 'गोविन्द ले लो, कोई गोविन्द ले लो!' यही पुकारती फिर रही है।

  3. नंदनंदन हिंडोरे झूलें माई री - श्री चतुर्भुज दास

    नंदलाल श्रीकृष्ण झूला झूल रहे हैं, और संग में वृषभानु-दुलारी श्रीराधा अपनी अनुपम छवि से मोहक शोभा बिखेर रही हैं। वन में चारों ओर रिमझिम वर्षा की बूँदें गिर रही हैं।

  4. नव किशोरी नव किशोर बनी है विचित्र जोरी - श्री चतुर्भुज दास

    युगल किशोरी-किशोर नवयौवन से युक्त, अनुपम सौंदर्य की दिव्य मूर्तियाँ हैं। श्रीकृष्ण, जो स्वयं कामदेव को मोहित करने वाले हैं, सौंदर्य के सागर हैं; और श्रीराधा, रूप-लावण्य की साक्षात मूर्ति हैं।

  5. ललित ब्रज देस गिरिराज राजें - श्री चतुर्भुजदास जी

    ब्रज के रमणीय क्षेत्र में, श्री गिरिराजी के पावन धाम में घोष सीमंतिनी श्री राधा के साथ श्री कृष्ण निरंतर केली करते हैं जिसका दर्शन कर कामदेव भी लज्जित हो जाता है ।

  6. धर्म अर्थ काम मोक्ष सब सुख के दाता - श्री चतुर्भुजदास जी

    धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों सहित समस्त सुख प्रदान करने वाले श्री गोवर्धनधर प्रभु श्रीकृष्ण ही गोकुल के त्राता और भक्तों के रक्षक हैं; अतः उनकी ही शरण ग्रहण करनी चाहिए।

  7. एक रसना किम कहूँ, गुण प्रकट विविध विहार - श्री चतुर्भुजदास जी

    जिस श्री कृष्ण के विहार का गान करने में वेद भी असमर्थ हैं, जिसकी लीला नित्य है, जो क्षण-क्षण नवीन लगती है, उसके गुणों का एक रसना से वर्णन करना मेरे लिए असंभव है।

  8. श्याम सों नेह कबहु न कीजै - श्री चतुर्भुज दास जी

    श्याम सुंदर से कभी नेह मत करना क्यूँकि उनका मन और शरीर दोनों ही काले हैं। वह मन मोहक एवं सलोने हैं, यदि आपने उनसे प्रीति की तो वह तुम्हारा सब कुछ ले लेंगे ।

  9. श्री चतुर्भुजदास जी की जीवनी

    श्री चतुर्भुजदास जी का जन्म 1597 में ब्रज के जमुनावता ग्राम में हुआ था। इनके पिता अष्टछाप के महान कवी श्री कुम्भनदास जी थे।

  10. प्रात में निकुंज द्वार ह्वै ललिता - श्री चतुर्भुज दास जी

    प्रातः समय में ललिता एवं अन्य सखियाँ निकुंज द्वार में वीना बजा रही हैं । चतुर एवं नवीन दम्पति राधा कृष्ण अपनी शैया पर विराजमान हैं एवं वीना का आनंद ले रहे हैं ।