लालन तन नैनन भरि चितई - श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (21)
श्री कृष्ण (लाल) ने प्रिया जी के श्रीअंगों को नेत्र भरकर निहारा। उस रूप माधुरी को देखकर वे मूर्छित होकर गिर पड़े और अपनी देह की सुधि भुला दी; ऐसा प्रतीत हुआ मानो श्री राधा के कटाक्षों की नोक उनके हृदय के पार हो गई हो।
