पापिनको सँग छाँड़ि जतन कर - श्री युगल प्रिया
साधक को भगवान से विमुख (अधर्मी) जीवों का संग छोड़ने का हर संभव प्रयत्न करना चाहिए, क्योंकि उनके द्वारा कहे गए शब्द तीखे बाणों के समान हृदय को छलनी कर देते हैं। उनके साथ अनजाने में होने वाले मिलन, दर्शन अथवा स्पर्श से भी सर्वथा भयभीत रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा असत्-संग भगवद-प्राप्ति के मार्ग में निश्चित ही एक बहुत बड़ा अवरोध बन जाता है।
