यह तन इक दिन होय - श्री युगल प्रिया
यह शरीर एक दिन अवश्य ही नष्ट होकर राख में मिल जाएगा, जिसके बाद इस संसार में तुम्हारा रत्ती भर भी नाम-निशान नहीं रहेगा और सारा जग तुम्हें भूल जाएगा। जब मृत्यु की निर्धारित घड़ी पूरी होगी, तब इस संसार के भ्रम-जाल को छूटने में एक क्षण का भी समय नहीं लगेगा।
