16 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं

  1. राधे अलबेली सरकार - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (115)

    श्री राधारानी अलबेली सरकार हैं — वे सम्पूर्ण वृन्दावन की अधिष्ठात्री महारानी हैं, रसिकों की जीवन-प्राण हैं, परम उदार एवं अत्यन्त सुकुमार हैं।

  2. संकर्षण-प्रिय-अनुज की, प्रिया प्राण आधार - ब्रज के दोहे

    संकर्षण (बलराम) के प्रिय छोटे भाई श्रीकृष्ण की प्रिया (श्रीराधा) ही मेरे प्राणों की आधार हैं। मैं उनके वर देने वाले (कृपा रूप) श्री चरणकमलों पर सदा बलिहारी जाता रहूँ ।

  3. श्री हरिदास अनूप अलि रसिक रूप बलिहार - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (47)

    रूप सखी कहते हैं कि स्वामी श्री हरिदास जी अद्वितीय हैं, मैं उनपर बार बार बलिहार जाता हूँ। वे इक-टक श्यामा कुंजबिहारी के अखंड नित्य विहार को ही अपलक नेत्रों से निहारते रहते हैं।

  4. सहज सनेही देहि द्वै - श्री हरिव्यस देवाचार्य, महावाणी, सुरत सुख (27)

    श्रीराधा-कृष्ण स्वभाव से ही परस्पर प्रेमी हैं और उनका यह दिव्य अनुराग नित्य एवं अखंड है। यद्यपि वे दो शरीरों में आभासित होते हैं, किंतु तात्विक रूप से वे एक ही हैं। मैं नित्य-विहारी युगल की इस अखंड विहार-लीला पर स्वयं को निछावर करता हूँ।

  5. देशकाल नहिँ नियम कछु नहिँ कछु शिष्टाचार - जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (41)

    मैं उस विलक्षण प्रेम-पंथ पर सर्वस्व न्यौछावर करता हूँ, जहाँ देश, काल अथवा बाह्य शिष्टाचार का कोई बंधन नहीं है। यहाँ केवल निष्कपट हृदय से निष्काम प्रेम करना ही सर्वस्व है।

  6. चातुरी पांच गौर सरकार - श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (5)

    गौरांगी स्वामिनी राधा पांच प्रकार की दक्षता से पूर्ण हैं। प्रथम दक्षता तो नृत्य-काल में उनके भ्रूनर्तन की है, जिसे देखकर उनके रसिक प्रियतम उन पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करते हैं। दूसरी दक्षता उनके तिरछे कटाक्षपातों की है जो प्रियतम के हृदय को घायल करने के लिए बरछी का कार्य करते हैं।

  7. बिहरें बिपिन बिहारी बिहारनि - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, उत्साह सुख (79)

    सुन्दर शिरोमणि परम सुकुमार श्रीप्रियाप्रियतम वृन्दाविपिन में विहार कर रहे हैं। दिव्य प्रम-सौन्दर्य से ओतप्रोत उनके अंग-प्रत्यंग पर कोटि-कोट कामदेव न्यौछावर हैं।

  8. अनोखी, वीणा वारी नारि - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, लीला-माधुरी (1)

    श्यामसुन्दर वीणा वाली नारी का भेष बनाये हुए हैं । जिनके सोलहों श्रृंगार के माधुर्य को देखकर अनन्त कामदेव की स्त्रियाँ बलिहार जाती हैं। वह अनोखी वीणा वाली नारी ठोढ़ी पर हाथ रखे हुए कुसुम सरोवर पर बैठी हैं।

  9. जाऊँ बलि, जोरी-युगल निहार - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, युगल माधुरी (3)

    श्यामा-श्याम की जोड़ी को निहार कर मैं बलिहार जाता हूँ । वृषभानुनंदिनी का शरीर गौर वर्ण का है , वे मनमोहन के मन को मोहित करने वाली हैं एवं स्वभावतः भोली हैं ।

  10. जय हो जय हो अलबेली सरकार बलिहार बलिहार - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (14)

    जय हो जय हो अलबेली सरकार बलिहार बलिहार । तेरी महिमा अपरंपार बलिहार बलिहार । तेरी ब्रम्ह करे जयकार बलिहार बलिहार ।