राग जयजयवन्ती

राग जयजयवन्ती उपलब्धि की खुशी और संतुष्टि की भावना व्यक्त करती है, हालांकि यह साथ में खोने के दुख को भी व्यक्त करती है। यह राग रात्री के पहले प्रहर में गाया जाता है। (शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक)

15 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. बहुत दिवस देखे बिन बीते - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (86)

    हे ललित लाड़ैती श्री राधे! आपके दर्शन किए बिना बहुत दिन बीत गए हैं। यदि मुझसे कोई भूल हो गई हो और उसी के कारण आप मुझसे विमुख अथवा उदास हो गई हों, तो कृपापूर्वक उस अपराध को अब क्षमा कर दीजिए और मुझे अपने दर्शन प्रदान कीजिए।

  2. कालीदह कूल कुंजके माहीं - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (28)

    मेरी यही अभिलाषा है कि मैं कालीदह के तट पर स्थित कुंजों में एक भ्रमरी बनकर वृक्षों की डालियों पर निवास करूँ अथवा निधिवन का तोता या कोयल बन जाऊँ और मधुर स्वर में निरंतर 'राधा' नाम का ही गान करूँ।

  3. वृंदावन बंसीवट जमुनातट बंसी रट - श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (122)

    यमुना के तट पर, बंसीवट की शीतल छाया में, बांसुरी की मधुर ध्वनि गूँज रही है। रसिक श्रीकृष्णचंद्र ने वन में रास लीला का दिव्य आयोजन रचा है।

  4. मेरे मनहिं हुलास स्वामिनी श्रीवन सुरख लहोंगी - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (282)

    हे स्वामिनी जू (श्री राधा)! मेरे मन में अति उल्लास भर चुका है कि अब मैं भी श्रीधाम वृंदावन में तुम्हारे सुकोमल लाल चरणों की छवि का दर्शन करूँगी।

  5. मैं पाऊ कृपाकरि मोहिनी - श्री जुगलप्रिया जी

    मन को मोहित करने वाले, श्री श्यामाश्याम के कुञ्ज भवन की सोहनी सेवा को कृपापूर्वक मैं कब प्राप्त करुँगी ? जहाँ श्री श्यामाश्याम के अंगों के आभूषणों की मणियाँ, माणिक्य, मुक्ता, आदि रत्न जब टूट कर बिखरेंगे तो मैं उन्हें खोजूँगी।

  6. आज तो छबीली राधे रसभरी डोलहीं - श्री भगवत रसिक, श्री भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (7.3)

    आज जो शोभामयी श्रीकिशोरी जी (श्री राधा) प्रेम रस में उन्मत्त होकर डोल (घूम) रही हैं । वे प्रियतम प्यारे के साथ दिव्य मदन के रंग में सराबोर हो रही हैं और उनके अंग अंग से आनंद की उमंगें ऐसे बरस रही हैं, जैसे (हाव भाव आदि) गुणों का खजाना ही खुल गया हो ।

  7. साँवरे की दृष्टि मानो प्रेम की कटारी है - श्री मीरा बाई

    साँवरे श्री कृष्ण की दृष्टि मानो प्रेम का ख़ंजर है । यदि एक बार किसी को लग गई, तो वो तो बेहाल होकर तन मन की सुधि भुला कर प्रेम में मतवाला होकर घूमेगा ।

  8. स्याम सलोनो प्यारो नंद जीउ को नागरु - श्री केवल राम जी, रास मान के पद (65)

    हे श्री राधे! प्यारो नंदलाल श्री कृष्ण आपकी प्रतीक्षा में रात भर जाग रहे हैं एवं व्याकुलता से वृंदावन की कुंजों में आपकी राह निहार रहे हैं ।

  9. मेरी गति तुही है लडैती प्रानप्यारीजू - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (120)

    हे मेरी राधा रानी केवल आप ही मेरी गति हैं। आप अत्यंत मुझसे पसंद है एवं आप ही हैं जो मेरा हित जानती हैं, आप समस्त गुणों की खान हैं एवं परम उदार हैं ।

  10. आज इन दोउन पै बलिहारी - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवदुलहीन लीला (17)

    आज हम दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण पे अपने आप को न्योछावर करते हैं । श्याम सुंदर की अनुपम सुंदरता लाखों "कामदेवों" को लज्जित करने वाली है और श्री राधा का सुंदर चेहरा चंद्रमा को लज्जित कर रहा है ।