राग खमाज

राग खमाज खमाज थाट के भीतर एक हिंदुस्तानी शास्त्रीय राग है जिसका नाम इसी राग के नाम पर रखा गया है। यह राग दोनों प्रकार के श्रृंगार, विप्रलंभ (पृथक्करण) और उत्तान (संघ) श्रृंगार के लिए एक आदर्श मधुर प्रारूप है। राग खमाज रात 9 बजे से 12 बजे के बीच गाया जाता है।

15 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. साँवरे देखे बिन परत न - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, श्री लालजी की उत्थापन लीला (13)

    हे सखी! साँवरे (श्रीकृष्ण) के दर्शन किए बिना मुझे तनिक भी चैन नहीं पड़ता। प्रत्येक क्षण मेरा मन व्याकुल रहता है, क्योंकि मेरे नेत्र उनके अनुपम रूप के दर्शन के लिए निरन्तर प्यासे हैं।

  2. बास बरसाने को मोहि दीजे - श्री सरस माधुरी

    हे किशोरी जी! मुझे अपने परम पावन धाम बरसाने का वास प्रदान कीजिए। हे कीर्ति मैया के कुल को सुशोभित करने वाली नवल कुँवरि श्री राधा! मेरी इस प्रार्थना को सुनिए और दया करके मुझे अपनी निज दासी बना लीजिए।

  3. वृन्दावनधाम नीको व्रजको विश्राम नीको - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (85)

    श्री वृन्दावन धाम अत्यंत सुंदर है, ब्रज मंडल का परम विश्राम सुखद है। श्यामा श्याम का नाम परम सुंदर एवं कल्याणकारी है और उनका यह धाम आनंद का साक्षात मंदिर है।

  4. हम तौ राधाकृष्न-उपासी - ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (11)

    हम तो केवल श्री राधा-कृष्ण के ही उपासक हैं। गौर वर्ण की श्री राधा और श्याम वर्ण के श्री कृष्ण की यह जोड़ी अत्यंत अभिराम, मनमोहक और सुख की राशि है।

  5. श्यामा चरण कमल की आस - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (32)

    हे श्यामा जू! मुझे केवल आपके चरण-कमलों की ही आशा है। हे श्री वृन्दावन की स्वामिनी श्री राधे! कृपा करके मुझे अपने समीप ही स्थान दीजिए। जहाँ यमुना जी का प्यारा तट सुशोभित है और आपका अपना निज-खास स्थली श्री सेवाकुञ्ज है, वहीं मुझे वास दीजिए।

  6. कवधौं कृपा लाड़िली ह्वै है - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (124)

    प्यारी श्री लाड़िलीजू (श्री राधा) की मुझ पर कब कृपा होगी, कि मैं भी सदा के लिए श्री वृन्दावन में वास करूँगा? कब मैं इन आँखों से श्यामाश्याम की उस अनुपम अथवा परम सुंदर छवि के दर्शन कर सकूँगा?

  7. हेस्वामिनि श्रीकुंजविहारिनि - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (122)

    हे स्वामिनी, श्री कुंज विहारिणी (श्री राधा)! कृपा करके शीघ्र मेरी सुध लें। मुझे सेवा की रीति कुछ भी नहीं आती, मेरी भूल को क्षमा कर दें।

  8. अँखिया रूपसुधामद मातीं - श्री ललित माधुरी

    मेरी अखियाँ श्री युगल सरकार की रूप-रस माधुरी के मद में पूरी तरह चूर हो गई हैं। बिना युगल छवि के दर्शन किए, ये अत्यंत आतुर हो उठती हैं और निरंतर अकुलाती रहती हैं।

  9. नवल प्रिया कृपालू ऐसी - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (103)

    नित्य किशोरी श्रीराधा अत्यंत कृपालु हैं। कोई कितना बड़ा अपराधी ही क्यों न हो, श्री राधा के चरण कमलों की शरण में आते ही समस्त बाधाएं सहजता से दूर हो जाती हैं।

  10. पड़त हौं पैयां कुञ्ज विहारिनी - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (26)

    हे कुंज बिहारिनी, गौर वर्ण वाली, वृषभानु नंदिनी श्री राधे! मैं तुम्हारे चरणों में पड़ता हूँ । जिस प्रकार चातक पक्षी को केवल स्वाति की बूँद की ही अनन्य आशा होती है एवं चकोर पक्षी केवल चंद्रमा को ही एक टुक निहारता है, उसी प्रकार मेरी भी अनन्य आशा एक मात्र आपकी ही करुणा पर टिकी हुई है ।

  11. हे स्वामिनि हर्षामिनि भामिनि अब मेरी सुधि लीजै - श्री ललित लड़ैती जी, श्री किशोरी करुणा कटाक्ष, विनय (25)

    हे स्वामिनी श्री राधा, अब मेरी भी सुधि ले लीजिए । मैंने अपना बहुत-भाँति से बिगाड़ कर लिया है, मेरी भूल को क्षमा कीजिये ।

  12. वृन्दावन धाम नीकौ - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (85)

    श्री वृंदावन धाम का क्षेत्र अति ही सुखद है और वहाँ समय व्यतीत करना आनंदमय है। दिव्य युगल श्री श्यामाजू और श्री श्यामजी के अद्भुत नाम अति ही आकर्षक हैं और सभी मंदिरों में आनंद प्रदान करते हैं।