लाल संग लै पौढी ललनां - श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विहार पदावली (65)
परम सुकुमार किशोरी जी (ललना) अपने प्राणप्रियतम लाल जी (श्री कृष्ण) को साथ लेकर शैया पर शयन कर रही हैं। वे दोनों एक-दूसरे के हृदय से हृदय को लगाकर, परस्पर आलिंगनबद्ध होकर, बिना किसी संकोच के इस अत्यंत एकांत निकुंज में दिव्य रस-विलास में मग्न हैं।
