चैन नहीं मन में न मलीन - ताज बेगम
ताज़ बीबी वर्णन करती हैं कि श्री कृष्ण के वियोग की इस दारुण अवस्था में न तो चित्त को विश्राम है और न ही इन अश्रुपूरित नेत्रों को रोए बिना शांति प्राप्त होती है।
ताज बेगम श्री कृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थीं, जिनका विवाह सम्राट अकबर के साथ हुआ था। उन्होंने भगवान कृष्ण के प्रेम में सब कुछ त्याग दिया और ब्रज में आ गई। उनकी समाधि रमणरेती, गोकुल से लगभग 2 किमी दूर स्थित है।
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ताज़ बीबी वर्णन करती हैं कि श्री कृष्ण के वियोग की इस दारुण अवस्था में न तो चित्त को विश्राम है और न ही इन अश्रुपूरित नेत्रों को रोए बिना शांति प्राप्त होती है।
कोई सूर्य पर भरोसा करता है कि वह अंधकार को मिटाकर प्रकाश देगा, कोई चंद्रमा पर भरोसा करता है कि वह शीतलता प्रदान करेगा।
समस्त संसार ही भगवान श्रीकृष्ण का है, इसके कण-कण में वे समाए हुए हैं। यह संसार किसी को बाधा नहीं पहुँचाता। वास्तव में जीव का अपना ही मन राग एवं द्वेष रूपी विकारों में अटका (फँसा) होता है। यदि मन को भगवान के भजन में लगा दिया जाए, तो इसकी समस्त अटकन सदा-सदा के लिए समाप्त हो जाए और वह जीव परम निर्भयता को प्राप्त कर ले।
इस पद में ताज बीबी कहती हैं — हे कृष्ण! जब से तुम्हारी वह मोहक मुस्कान मेरे नेत्रों ने देखी, तब से मेरा हृदय प्रेम से सराबोर हो गया।
स्वयं भगवान श्रीकृष्ण, नंद के पुत्र के रूप में इस संसार में प्रकट हुए। उन्होंने राक्षसों का वध किया और कालिया नाग के सिर पर अपनी छाप छोड़ी।
समस्त कामनाएँ, लालच एवं टोटके (अंधविश्वासों) को त्याग कर अपने प्रियतम (इष्टदेव) की आज्ञा का पालन करो जिससे वे सहज ही वश में हो जाएँगे ।
सूर्य के प्रकाश के बिना, कमल के फूल की पाँखड़िया बंद रहती हैं, केतकी फूल की सुगंध के बिना, भँवरे दुखी रहते हैं।
कदंब की कुंजों के निकट, यमुना के किनारे, मन में एक ऐसी इच्छा हुई कि सुंदर कमल के फूलों से सुसज्जित एक सेज हो ।
ताज बीबी श्री कृष्ण की परम भक्त थीं । इनका जन्म 17वीं शताब्दी में हुआ था । ताज बीबी के पिता का नाम पद्न खान था । ताज बीबी का विवाह बादशाह अकबर के साथ हुआ था ।
ताज बेगम कहती हैं, 'जिन्होंने ध्रुव, प्रह्लाद, गज-ग्राह, अहिल्या देवी, शबरी, गीधराज जटायु और विभीषण को इस संसार सागर से पार उतारा, वही श्री हरि हमारे हैं।'
सबको श्री ब्रह्मा जी पर भरोसा है इस सृष्टि को रचने के लिए, और शिव जी पर भरोसा है इसे संहार करने के लिए।
कुछ लोग राजाओं, ठाकुरों आदि की सेवा (पूजा) करते हैं, कुछ लोग अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए भैरव की भक्ति करते हैं।
ताज बीबी श्री कृष्ण की परम भक्त थीं। इनका जन्म 17th शताब्दी में हुआ था। ताज बीबी के पिता का नाम पद्न खान था। ताज बीबी का विवाह बादशाह अकबर के साथ हुआ था।
किसी को बद्रीनाथ धाम पर भरोसा है, किसी को श्री जगन्नाथ जी के प्रसाद पर भरोसा है ।
ताज बीबी कहतीं हैं "किसी को चारों वेदों के स्वाध्याय पर ही भरोसा है तो किसी को गंगा स्नान पर।"
वह अत्यंत छबीला है, सभी कलाओं में निपुण और चतुर शिरोमणि है। उसकी चित्त स्थिरता उसे देवताओं में अद्वितीय बनाती है।
ताज बेगम [ताज बीबी] इस पद में डंके की चोट पर कहती हैं कि, "ए मेरे दिलजानी [श्री कृष्ण], मेरे दिल की कहानी को ज़रा सुनो, तुम्हारी रूप माधुरी ने मुझे ख़रीद लिया है, अब मैं हर प्रकार की बदनामी भी सहूँगी।"
अल्लाह, बिस्मिल्लाह, रहीम, 'पीर' और अन्य शहीदों सहित ईश्वर के सभी रूपों और ईश्वर के दूतों के बारे में अब मैं कभी बात नहीं करूंगी। अब से मैं केवल श्री राधा-कृष्ण के बारे में ही बात करूंगी।