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  1. नमो कृष्ण जै नित्य विहारी - श्री गोविंद शरण देवाचार्य, श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (3)

    नित्य निकुंज में विहार करने वाले श्री कृष्ण को नमस्कार है। वे अपनी प्राणप्रिया श्री राधा जी के साथ नित्य-नवीन केलि-विलास करते हुए सर्वदा जययुक्त (सुशोभित) हैं।

  2. सनेही एक विहारी-विहारिनि एक - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (99)

    परम स्नेही केवल एक श्रीविहारी और श्रीविहारिणी ही हैं, जो परस्पर एक ही प्रेम और रुचि में रंगे हुए हैं तथा एक-दूसरे को अत्यंत अद्भुत भाव से निहारते हैं।

  3. खेलत हैं वसंत विहारी विहारिन - गोस्वामी श्रीहितलाल जी

    युगल सरकार, श्री विहारी-विहारिन, आज वसंत उत्सव माना रहे हैं। अबीर और गुलाल के रस-मेघ उमड़ रहे हैं, मानो रंगों की पिचकारी से प्रेम-रंग बरस रहा हो।

  4. स्यामा सुकुमारी प्राणप्यारी श्रीविहारीजी की - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद

    श्रीराधा परम सुकुमारी हैं, श्रीविहारी (कृष्ण) की प्राणों से भी अधिक प्यारी हैं। वे परम सुंदर, सब की शिरोमणि स्वामिनी हैं।

  5. जाकी कृपा सों नित्य दिव्य ब्रजमंडल माँहि - श्री गिरिराज गोस्वामी 'अनन्त' (गोकुल)

    जिनके श्री चरणों की कृपा से मनुष्य नित्य दिव्य ब्रज धाम वास करता हूँ, रमण-बिहारी एवं बिहारिणी की अंतरंग लीलाओं का अवलोकन करता है।

  6. मोहि भरोसौ स्वामी जी को - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (91)

    मुझे तो ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी पर विश्वास है । उनकी करुणा ऐसी है कि वे जिस पर कृपा करते हैं, उसे भी अपने समान बना लेते हैं । अर्थात् जिस प्रकार वे स्वयं श्री प्रिया-प्रियतम की सेवा करते हैं, वही सेवा का अधिकार वे अपने कृपापात्र को भी दे देते हैं। उनके प्राणों का आधार युगल नित्य विहार है ।

  7. आरती भानु दुलारी की - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

    मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। राधा रानी दिव्य धाम वृंदावन में रत्न जड़ित स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं।

  8. वाँह-विहारी की गहों बसों विहारी धाम - ब्रज के दोहे

    श्री बाँके बिहारी लाल जी की बाँह को पकड़ो, श्री बाँके बिहारीजी के धाम श्री वृंदावन में बसो, श्री बाँके बिहारी जी के दर्शन करो एवं श्री बिहारी जी के नाम का रटन करो।

  9. हों न भई रज कुंज ललित वन - श्री ललित माधुरी

    यदि मैं वृंदावन की किसी ललित कुंज की रज होता तो यह मेरा परम सौभाग्य होता, जिससे मैं श्री श्यामाश्याम के चरण कमलों से लगा रहता और मेरा मन प्रसन्नता से सदा फूला रहता।

  10. श्री प्रिया विहारी कुंज में, विहरत मदन हुलास - श्री संतदास, विहार रसामृत

    दिव्य दंपति बाँके बिहारी एवं बिहारिनी जू, वृंदावन की कुंजों में विहार पारायण हैं, जिनके युगल चरणों की सेवा नित्य ही सखियाँ करती हैं । ऐसी कृपा हो कि वे युगल चरण मेरे ह्रदय को भी प्रकाशित करें ।

  11. सनेही एक विहारी-विहारिनि - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (98)

    अखिल विश्व-ब्रह्माण्ड में यदि कोई प्रेमी है, तो वह केवल श्री वृन्दावन निकुञ्ज-विलासी विहारी-विहारिणी श्री लाड़िली-लाल ही हैं, जो केवल अनन्य प्रेम की रंग-रुचि में अद्भुत रूप से अनुरञ्जित हुए देखे जाते हैं।

  12. कौन सके गुन गाय तिहारे - श्री माधुरी दास

    हे श्री कुंजबिहारी और श्री कुंजबिहारिनी जू! ऐसा कौन है जो आपके अगाध गुणों का गान करने में समर्थ हो? आप दोनों तो रूप, विलास और प्रेम की सीमा हैं, जो सदा केली क्रीड़ा के अद्भुत रस और रंग में लीन रहते हैं।