राग कल्याण (ईमन)

राग कल्याण एक संध्याकालीन राग है और इसका शाब्दिक अर्थ है सौभाग्य। इस राग के श्रवण को आशीर्वाद-प्राप्ति और सुखदायक माना जाता है। इस राग को यमन, ईमन इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। गान का समय - श्याम 6 बजे से रात के 9 बजे तक

51 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. प्रभु के दो ही दास हैं साँचे - श्री रूप कुँवरि जी

    इस संसार में प्रभु के केवल दो प्रकार के सच्चे दास (भक्त) होते हैं—एक वे, जो नियमों का दृढ़ता से पालन करने वाले नेमी हैं, और दूसरे वे, जो अनन्य भाव में डूबे हुए प्रेमी हैं।

  2. बचन दै मान न करौं - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (59)

    प्रियतम बाँके बिहारी श्री राधा रानी से कहते हैं— हे प्यारीजू! वचन दीजिये कि आप कभी मान न करेंगी। मन से कभी मान नहीं करेंगी, वचनों से कभी रुखाई न बरतेंगी, एवं किसी क्रिया द्वारा अर्थात् भौहों को टेड़ी करके मुझे डरायेंगी नहीं।

  3. बृंदाबन खेलत हरि होरी - श्री सूरदास, सूरसागर

    वृंदावन में भगवान हरि (श्रीकृष्ण) होली खेल रहे हैं। वहाँ ताल, मृदंग, झाँझ और डफ बज रहे हैं, और नंदलाल (कृष्ण) व वृषभानुकिशोरी (राधा मिलकर उत्सव मना रहे हैं।

  4. जयति जयति वृषभानु दुलारी - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (06)

    वृषभानु दुलारी, श्री राधा महारानी की बार-बार जय हो। उस परम मनोहर श्री धाम वृन्दावन की जय हो, जहाँ लताओं, कुंजों और पुष्पों की सुगन्धित फुलवारी सदा शोभायमान रहती है।

  5. भानुनन्दिनी मो तन हेरो - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (15)

    हे भानुनन्दिनी, श्री राधा! मेरी ओर कृपा-दृष्टि डालिये। विषय-वासनाओं से मेरा हृदय तप रहा है— अपनी कृपा-कटाक्ष का एक कण बरसा कर इसे शीतलता प्रदान कीजिए

  6. ऐसी को करिहै श्रीराधा - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (292)

    हे श्रीराधे! इस पूरे ब्रह्मांड में ऐसी परम कृपालुता से युक्त कौन हो सकता है, जो अपने नाम के केवल ‘रा’ अक्षर के उच्चारण मात्र से अपनी शरणागत दासी के हृदय का अंधकार मिटा दे।

  7. माई री! नंद-नंदन मेरौ मन जु हर्यौ - श्री छीत स्वामी

    एक सखी अन्य सखी से कहती है — हे सखी! नंदनंदन श्रीकृष्ण ने मेरा मन चुरा लिया है। जब मैं गाय का दूध दुहने जा रही थी, तभी कृष्ण ने मेरी ओर देखकर मुस्कुरा दिया और न जाने कौन सा जादू कर दिया।

  8. आजु बनी अति सारंग नैनी - श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी

    सारंग के समान नेत्रों वाली श्रीराधा आज अत्यंत सुंदर बनी हैं। कामदेव को भी मोहित करने वाले श्रीकृष्ण भी राधा के सौंदर्य में पूर्णतः रच-पचकर, उनके बालों की वेणी सजाने में लगे हैं।

  9. लगी मेरी मदन मोहन से यारी - श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (136)

    मेरी मदन मोहन (श्रीकृष्ण) से एक अंतरंग यारी बन गई है। उनके टेढ़े मुकुट की लटक मेरे हृदय में ऐसे बस गई है कि अब उनके अतिरिक्त मेरी किसी और से लगन ही नहीं रही।

  10. प्रीतम के प्रान प्यारी - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (37)

    श्री राधा श्री कृष्ण के प्राण हैं और श्री राधा के प्राण हैं श्री कृष्ण। ऐसे प्रेम-राशि युगल परस्पर एक दूसरे की छवि का निरंतर अवलोकन करते रहते हैं, तथापि किसी भी प्रकार तृप्त नहीं होते, वरन् उनकी रुचि अधिकाधिक बढ़ती ही जाती है।

  11. हा हा मैं सब भाँति विगारी - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (4)

    मैंने सब प्रकार से बिगाड़ ली है । मैंने वेद-शास्त्रों की मर्यादा, संसार की लाज, और कुल की मान-मर्यादा, सभी का त्याग कर दिया है।

  12. राधिकावल्लभ प्यारी सोहै तन नील सारी - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (38)

    श्री वल्लभ लाल जू की प्रिया श्री राधिका के सुन्दर तन पर नील वर्ण की साड़ी एवं सुगन्ध से सनी हुई सुन्दर कञ्चुकी भली प्रकार कसी हुई शोभित है।

  13. अजहूँ कहा कहति है री मारै नैंन आरनि - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (64)

    हे प्रियाजू ! आपकी चितवन के प्रहार से लाल (श्री कृष्ण) के हृदय में ऐसी वेदना हो रही है, क्या अब भी कुछ कहना शेष है ? अब क्या कहती हो ?

  14. प्यारी तेरौ बदन चंद देखैं - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (57)

    लालजी (श्री कृष्ण) श्री राधा से कहते हैं - हे प्यारी जू, आपके चन्द्र वदन को देखकर मेरे हृदय रूपी सरोवर में चाह रूपी कमल प्रफुल्लित हुई है।

  15. छबीली बिहारिनि की छबि पर बलिहारी - ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (62)

    छबीली बिहारिनि श्री राधा जू की छवि पर मैं स्वयं को न्योंछावर करता हूँ। ब्रज की नित्य नवल किशोरी, सखियों की शिरोमणि, श्री श्यामा जू ने कुञ्ज-बिहारी श्री कृष्ण को अपने वश में कर रखा है।