तू न काहु कौ होइगौ - श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.66)
इस संसार में न तो तू कभी किसी का हो सकेगा और न ही कोई वास्तव में तेरा अपना है। इसलिए सब कुछ त्यागकर तू केवल श्री वृंदावन धाम में वास कर, जहाँ श्री राधा कृष्ण हर प्रकार से तेरी बाँह थामकर तुझे अपनी शरण में रखेंगे।
