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  1. मन में बसी बस चाह यही - ब्रज के सवैया

    हे राधा कृष्ण! अब मेरे मन में बस यही चाह है कि मैं दिन-रात तुम्हारा ही नाम लेता रहूँ। अपने मन रूपी मंदिर में तुमको बिठलाकर, तुम्हारा मनमोहक रूप निहारा करूँ ।

  2. आरती भानु दुलारी की - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

    मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। राधा रानी दिव्य धाम वृंदावन में रत्न जड़ित स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं।

  3. गोस्वामी श्री हित राधालाल जी की जीवनी

    गो. श्रीराधालाल जी का जन्म 1885 की आश्विन बदी तृतीया के दिन वृन्दावन में हुआ था। इनके पिता गो. श्रीगोवर्द्धनलाल जी श्रीराधावल्लभ मन्दिर के रासवंशीय सेवाधिकारी थे।

  4. श्री गुणमंजरीदास (श्री गल्लू गोस्वामी) जी की जीवनी

    माध्वगौड़ेश्वराचार्य परम सन्त पूज्य पाद गोस्वामी श्री गल्लू जी महाराज के पिता का नाम श्रीरमण दयालजी महाराज था । श्री गल्लू जी महाराज का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी सन् 1827 में हुआ था । इनके एकमात्र पुत्र श्रीराधाचरण गोस्वामी जी हुये । श्रीराधाचरण जी की माँ का नाम श्रीमती सूर्यादेवी गोस्वामी था ।

  5. प्राननाथ व्रजनाथ जू - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (28)

    हे प्राणनाथ, हे ब्रजनाथ, हे नंदनंदन श्रीकृष्ण! मेरे हृदय की पीड़ा को हर लीजिए। मैं भवसागर में डूब रहा हूँ—दौड़कर मुझे अपनी करुणामयी भुजाओं में भरकर सदा के लिए अपना बना लीजिए।

  6. श्री परमानंद दासजी की समाधि, सुरभि कुंड, गोवर्धन

    श्री परमानंददास जी ब्रज के रसिक संत थे और पुष्टिमार्ग के अष्टछाप कवियों में से एक थे । श्री परमानंद दास जी अपने द्वारा रचित छंदों का बड़े मधुर राग में गान और कीर्तन करते थे ।

  7. श्री कल्याण पुजारी जी की जीवनी

    कल्याण पुजारी जी दृढ व्रत धारण करनेवाले भक्त हैं जो नवल किशोर श्री श्यामाश्याम के अनन्य रस-उपासक हैं । इनके मुख से मधुर वाणी निकलती थी जो सबके मन का हरण कर लेती थी एवं सुख देनेवाली थी ।

  8. आरती मदन गोपाल की कीजियै - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (18)

    मदनगोपाल की आरती करनी चाहिये। देवऋषि नारद, वेदव्यास एवं शुकदेवजी जब विश्वास पूर्वक इस बात को कहते हैं तब (मदनगोपाल की आरती करके) बिना श्रम के रससिन्धु का पान क्यों नहीं करते?

  9. श्री प्रियाकान्त जू मंदिर - वृन्दावन

    श्री प्रियाकान्त जू मंदिर श्री राधा कृष्ण को समर्पित है जिसे 2009 में विश्व शांति चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री देवकीनंदन ठाकुर द्वारा स्थापित किया गया था, और इसे पूरा होने में लगभग सात साल लगे ।

  10. श्री हित गोपालदास जी की जीवनी 

    श्री गोपालदास जी "लघु सखी" राधावल्लभ संप्रदाय में दीक्षित एक परम भक्त थे। इनका जन्म पंजाब में 1940 के आसपास अनुमानित होता है।

  11. श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की जीवनी

    श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी महाराज अखिल भारतीय जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य पीठ (सलेमाबाद, किशनगढ़) के एक सुप्रतिष्ठित आचार्य थे। इनकी विद्वत्ता और भक्ति भावना इनकी वाणी के अनुशीलन से स्पष्ट हो सकती है।

  12. श्री चतुर्भुजदास जी की जीवनी

    श्री चतुर्भुजदास जी का जन्म 1597 में ब्रज के जमुनावता ग्राम में हुआ था। इनके पिता अष्टछाप के महान कवी श्री कुम्भनदास जी थे।