राग आसावरी

कुंकुमांकित वक्षोजौ पुरुषेण समास्थिता। संगीतरसिका राजत्यसावरी मुनेर्मते॥ - देवर्षि नारद, राग निरूपणम् (141) राग असावरी, राग दीपक की पत्नी हैं। वे अपने पति के संग आनंद परायण हैं, उनका वक्षस्थल कुमकुम रंजीत है। ऋषि नारद के अनुसार, वे संगीत की एक श्रेष्ठ श्रोता हैं। राग आसावरी को दिन के दूसरे प्रहर में गाया जाता है।

30 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. किशोरी मैं तो भली बुरी सो तेरी - श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (16)

    हे किशोरी श्री राधे! मैं जैसी भी हूँ, भली या बुरी, केवल आपकी ही हूँ। मैं विरह की अग्नि में दिन-रात व्याकुल रहती हूँ, कृपा करके मेरी यह पुकार जल्दी सुन लीजिए।

  2. राधे तेरी सदा-सदा की दासी- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (18)

    हे राधे, मैं सदा-सदा की आपकी दासी हूँ। कृपया मुझे अपने महल की टहल प्रदान कर, मेरे भाव का पोषण कीजिए एवं, मुझे अपनी निज सेवा प्रदान करें।

  3. मन तू राधा-राधा भज ले - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (83)

    अरे मन! तू “राधा राधा” नाम का भावपूर्ण भजन कर क्यूँकि इसका भजन निरंतर शुकदेव, शिव, नारद, सनकादिक एवं ब्रह्मा जी भी करते हैं ।

  4. कृष्ण नाम जबतें श्रवण सुन्यो री आली - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (54)

    श्री नंददास जी एक सखी रूप से अन्य सखी से कहते हैं कि - हे सखि ! जब से कानो में कृष्ण का नाम सुना है , तब से मैं अपना घर संसार भूल, बाँवरी बन गयी हूँ ।

  5. श्याम सों नेह कबहु न कीजै - श्री चतुर्भुज दास जी

    श्याम सुंदर से कभी नेह मत करना क्यूँकि उनका मन और शरीर दोनों ही काले हैं। वह मन मोहक एवं सलोने हैं, यदि आपने उनसे प्रीति की तो वह तुम्हारा सब कुछ ले लेंगे ।

  6. राधाजू ! मोपै आजु ढरौ - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (17)

    हे श्री राधा, आज मुझपर अपनी करुणा दृष्टि कीजिये । अपनी एवं अपने (निज) प्रियतम श्री कृष्ण की चरण रज की रति मुझे प्रदान कीजिये ।

  7. श्रीवृषभान नृपति के आंगन - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (53)

    आज सब जन राजा श्री वृषभानु के प्रांगण में बधाई गीत गाकर उत्सव मना रहे हैं जहाँ रानी कीर्ति की कोख में समस्त गुणों से युक्त, सुख की खानी स्वरूपा एक पुत्री [श्री राधा] ने जन्म लिया है ।

  8. ग्वालिन कृष्ण दरस सों अटकी - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (160)

    श्री कृष्णदास जी कहते हैं "ब्रज की गोपियाँ श्री कृष्ण दर्शन के लिए व्याकुल चित्त हैं, इसलिए बार-बार वे सब पनघट पर आती हैं और अपने सर पर यमुना जल से भरी मटकी रखती हैं।"

  9. धन-धन प्यारौ राधा नाम - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (75)

    प्यारौ श्री राधा नाम धन्य धन्य (परम पूजनीय) है। इस दिव्य श्री राधा नाम को जब जीव आठों याम हृदय से धारण कर लेता है तब सहज ही श्याम सुंदर का हृदय में प्रादुर्भाव हो जाता है।

  10. राधा माधव भैंट भई - श्री सूरदास, सूरसागर, द्वारिका चरित (50)

    प्रस्तुत पद में श्री सूरदास जी, राधा माधव की मिलन लीला का वर्णन करते कहते हैं कि, "श्री राधा और श्री कृष्ण जब मिलते हैं (राधा कृष्ण बन जाते हैं और कृष्ण राधा बन जाती हैं ) तो उनके रूप एक समान हो जाते है

  11. स्यामा स्याम वलैया लैहौं - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्ध (453)

    श्री हरिराम व्यास कह रहे हैं की स्वयं को न्यौछावर करते हुए श्री वृन्दावन धाम का वास करुँगा। परम पवित्र श्रीयमुना जी में स्नान करुँगा और ब्रजवासीयों की जूठन को प्रशाद रूप में ग्रहण करुँगा। बंसीवट के परम रमणिक भूमी में भ्रमण करुँगा और लताओं के सुन्दर कुंजों का त्याग कर कहीं और नहीं जाउँगा। जब भी श्री राधा मान लीला करेंगी तो मैं उन्हें बड़े प्रेम पूर्वक मनाउँगा।