प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (21)
हे प्यारी जू! मेरी यही अभिलाषा है कि मैं नित-निरंतर आपको इसी प्रकार निहारता रहूँ। आपके इस चंद्रमा के समान सुंदर मुखमंडल की नज़र उतारने के लिए मैं तिनका तोडूँ और राई-नमक न्योछावर करूँ।
