मोहिं मनमोहन मनभाय रे - श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा, सिद्धांत माधुरी (80)
मुझे तो केवल वे मन को मोहने वाले प्राणप्रिय मनमोहन (श्री कृष्ण) ही मनभावन लगते हैं। कोई जप करता है, कोई तप करता है, कोई व्रत रखता है, तो कोई जंगल में जाकर समाधि लगाता है।
