कोमल कमल हू सों गहरे गुलाबन सों - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (06)
श्री राधारानी के चरण कमल से भी अधिक सुकोमल हैं, गहरे गुलाब के फूल की आभा से भी अधिक रक्तिम हैं। नकी लालिमा आम्र-पत्रों की कोमल आभा को भी फीका कर देती है।
श्री राधा शतक श्री लाल बलबीर ने अपनी पुस्तक ब्रज विनोद में लिखा है जिनमें श्री राधा का अद्भुत गुणगान है जिन्हें सौ दोहों एवं पदों में पिरोया गया है।
29 लेख उपलब्ध हैं
श्री राधारानी के चरण कमल से भी अधिक सुकोमल हैं, गहरे गुलाब के फूल की आभा से भी अधिक रक्तिम हैं। नकी लालिमा आम्र-पत्रों की कोमल आभा को भी फीका कर देती है।
जिनके चरणों की स्तुति इन्द्र और शेष भी “नेति-नेति” कहकर करते हैं, वे परमब्रह्म भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारे चरणों में सिर नवाकर, हाथ जोड़कर खड़े हैं।
न मैंने योग-साधना की, न यज्ञ किए, न जप, न तपस्या, और न ही तीर्थों की यात्रा की। यहाँ तक कि मैंने भगवान श्री हरि की कथाएँ भी नहीं सुनीं।
समस्त मुनिगण आपके चरणों की वंदना करते हैं । आप आनंद कंद, ब्रजराज श्री कृष्ण की चिरसंगिनी हैं ।
महारानी कीरति को एक दिव्य कन्या का जन्म हुआ है, जिनके दर्शन के लिए व्रज के समस्त गोप-गोपीजन उमड़े हुए हैं। सभी हर्ष में नाच रहे हैं, कूद रहे हैं, मंगल गीत गा रहे हैं, और दही-माखन आदि लुटा रहे हैं।
जगत के जंजाल को छोड़ कर श्री राधारानी के चरण कमलों की शरण ग्रहण करो, जहाँ किसी का भी भय नहीं रहता।
मेरी स्वामिनी श्री राधा जू भामिनि हैं जिनकी गति हंस के समान है, जिनके बदन की कांति कोटि कोटि दामिनी की द्युति के समान है जो प्रियतम श्री कृष्ण के चित्त को चुराने वाली हैं।
श्री राधा महारानी जू के द्वार राजा एवं धनी जन भाग भाग कर आते हैं। विमला सी स्त्रियाँ जिनके रूप को निहार कर अपने प्राणों को उनपर न्यौछवार करती हैं।
कुंज महल के भीतर ब्रज की महारानी श्री राधिका बैठीं हैं जिनके अंगों की सुगंध से भँवर मतवाले से हो रहे हैं।
माणिक्य के महल में राज राजेश्वरी श्री राधा विराजमान हैं, जिनके समक्ष 14 लोकों की उपमा भी लज्जित हो रही है।
श्री लाल बलबीर कहते हैं कि जब मेरा मन बार बार विचार करता है तो वह केवल एक श्री राधा नाम को ही जानता है जो समस्त सार का सार है और जो भव सागर से पार कराने वाला है।
जब रूप की अगाधा, श्री वृषभानु कुमारी, साक्षात नित्य बिहारीनी श्री राधा यमुना के तट पर स्नान करने के लिए सुशोभित होती हैं, तब वृंदावन में उनके दिव्य अंगों की सुंदरता की वर्षा होती है।
श्री लाल बलबीर कह रहें हैं "ऐसी परम करुणामई श्री किशोरी जू को भुलाकर यदि जीव किसी और का भजन करता है, तो उस जीव को धिक्कार है।"
श्री लाल बलबीर जी कहते हैं "अपना एकमात्र काम दिन-रात "राधा राधा" नाम से ही रखो।
जिनकी शरण मे जाने से रंच मात्र भी हृदय मे भय नहीं रह जाता, ऐसे श्री राधा रानी के चरण कमलों का दासत्व स्वीकार करते ही तत्क्षण वे हृदय को निहाल कर देते हैं।
श्री राधा रानी के चरण कमल उनकी अनन्य शरणागति के बिना उन साधकों के लिए, जो अपने साधन की आस लेकर बैठे हैं, एवं सिद्ध महापुरुषों तक के लिए दुर्लभ हैं, परंतु जो उनकी अनन्य शरण में हैं, उनके लिए चरण कमल सुलभ हैं, और बिन साधन ही ये चरण अष्ट सिद्धियाँ एवं नवों निधियाँ प्रदान करने वाली हैं और उनकी नित्य रक्षा करने वाले हैं।
श्री राधा रानी के चरण कमल अष्ट सिद्धियों को प्रदान करने वाले हैं, संत जनों की नित्य सहायक हैं, सृष्टि के मूल स्त्रोत हैं, और समस्त प्रकार से आनंद प्रदान करने वाले हैं।
श्री लाल बलबीर कहते हैं कि मैं यही वर पाना चाहता हूँ कि मैं आपके सुख एवं नाम के लिए नित्य ही ललचाया करूँ, आप मुझे निकुंज में ही नित्य वास दें चाहे किसी भी रूप में, और हे राधे, मैं केवल और केवल आपका ही कहलाऊँ ।
डोलते, फिरते और मुख से कुछ भी बोलते समय नित्य ही "राधे राधे" जपो, और समस्त संसार के मिथ्या ख़्यालों से मन हटा कर नित्य ही इस अद्भुत "राधे राधे" नाम का जप करो।
हे मेरे मन, उस स्थान पर दौड़ कर चल जहाँ श्री राधा नाम का गुन गाया जाता है।