25 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं

  1. जो मारग खोजत फिरत अजहूँ शेष महेश - चाचा वृन्‍दावनदासजी, रसिक अनन्य परचावली (32)

    जिस वृन्दावन-रस रूपी मार्ग को ब्रह्मा, शेष, शिव आदि भी खोजते फिरते हैं, उसी अद्भुत मार्ग को आपने इस पृथ्वी पर दुर्लभ से सुलभ बना दिया। हे रसिक-शिरोमणि, श्रीहित हरिवंश महाप्रभु! आपकी जय हो।

  2. तज शेष खगेश को दौड़ते जो - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’

    यदि स्वप्न में भी कोई दुखी जीव आह भरकर उन्हें पुकारता है, तो वे (श्रीकृष्ण) शेषनाग और गरुड़ आदि को भी त्यागकर उसकी ओर दौड़ पड़ते हैं।

  3. धरा धाम में माधव ने इतना किसी गोपिका को अपनाया नहीं - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’

    इस धराधाम पर श्रीकृष्ण ने किसी भी गोपी को उतना नहीं अपनाया, जितना उन्होंने उस एक गोपी (श्रीराधा) को अपनाया, जिन्हें अपने साथ वे रास में अकेले ले गए। इस रहस्य को वेद भी नहीं जान सके।

  4. नव कुँवर चक्र चूड़ा नृपतिमनि साँवरौ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (46)

    श्री वृंदावन धाम प्रेम की राजधानी है जहां के राजा नायक शिरोमणि श्री श्‍याम सुन्‍दर और रानी तरुणि-मणि श्री राधिका हैं । पाताल से वैकुंठ तक के सब लोकों का स्वामी यह वृंदावन धाम है ।

  5. जाकौं वेद रटत ब्रह्मा रटत - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (1)

    जिसके नाम को वेद रटते हैं, ब्रह्मा रटते हैं, भगवान शिव रटते हैं, शेष रटते हैं, नारद, शुकदेव एवं वेद व्यास जी रटते हैं लेकिन पार नहीं पाते।

  6. श्री ब्रजवासीदास जी की जीवनी 

    रसिक भक्त कवि श्री ब्रजवासीदास जी परम विरक्त एवं सांसारिक प्रचार-प्रपंच से सर्वदा दूर रहने वाले सिद्ध भक्त थे। निरन्तर श्रीराधा माधव का चिन्तन एवं उनका ही गुणानुवाद वर्णन इनका प्रमुख कार्य था।

  7. शोभा बृन्दाविपिन की, बरणी सकै अस कौन - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास

    श्री वृन्दावन धाम की शोभा और सुन्दरता का वर्णन भला ऐसा कौन है जो कर सके जब शेषनाग, महादेव, गणेश जी और ब्रह्मा जी भी उसकी महिमा का पार नहीं पा सकते।

  8. श्री वृंदावन माधुरी कैसे कैं कहि जाइ - श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (26)

    श्री वृन्दावन की माधुरी का वर्णन किस प्रकार किया जाए? जिसका वर्णन करते-करते सहस्रमुखी शेषनाग भी थक गए और श्री ब्रह्मा जी भी उसका पार न पा सके।

  9. बरसाने के वास की आस करे शिव शेष - ब्रज के दोहे

    शिव, शेषनाग आदि देवता भी बरसाना-वास की आशा रखते हैं। बरसाना की महिमा का बखान कौन कर सकता है, जहाँ स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी सखी का रूप धारण करके प्रवेश करते हैं।

  10. ब्रज रज जाकूँ मिलि गयी - ब्रज के दोहे

    जिसे ब्रज की रज प्राप्त हो जाती है, उसकी कोई इच्छा शेष नहीं रह जाती; क्योंकि ब्रज की लालसा तो नित्य ही ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी आदि को भी बनी रहती है।

  11. श्री राधा चालीसा - चालीस श्लोकों में श्री राधा महिमा गुणगान

    हे वृषभानु नंदिनी श्री राधा, आप भक्तों के प्राणों की आधार हैं। हे वृन्दावन विहारिणी, मैं बार-बार आपको प्रणाम करता हूँ। हे कृष्ण प्रिया, हे समस्त सुखों की धाम, मैं जैसा भी हूँ, जो भी हूँ, परन्तु आपका ही हूँ।

  12. मुरली की माला करी, नन्द लाला बस हेत - श्री नागरीदास जी (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, व्रज सार (16)

    श्री कृष्ण, प्रेम के वश मुरली में "राधे राधे" शब्द की धुन बजा रहे हैं, जिससे यह समस्त ब्रह्मांड मोहित हो रहा है, और इससे यह सिद्ध हो रहा है की राधा नाम अति गूढ़ एवं मन्त्र शिरोमणि है।