है हरि तें हरिनाम बड़ेरो - श्री गदाधर भट्ट जी की वाणी (15)
भगवान हरि से भी बड़ा उनका ‘नाम’ है; हे मूर्ख! तू इस सत्य को स्वीकार करने में संकोच क्यों करता है? इसका प्रमाण देख—मुचकुंद को भगवान ने साक्षात् दर्शन दिए, फिर भी उन्हें आगे तपस्या करने की आज्ञा मिली; अर्थात् दर्शन के बाद भी उन्हें पूर्ण विश्राम नहीं मिला।
