राग देश

राग देश रात्री के दूसरे प्रहर में गाया जाता है। (9 बजे से 12 बजे)

21 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. करुणा करि वन वास दीजिए - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (08)

    हे स्वामिनी! कृपा करके मुझे अपने निज धाम श्री वृन्दावन का वास प्रदान कीजिये। हे करुणामयी! क्या कारण है कि आपने मुझे अपनी स्मृति से विस्मृत कर दिया है? हा राधे! आपने मुझे अपने महल की टहल (सेवा) से क्यों वंचित कर दिया? मुझसे ऐसा कौन सा अपराध बन पड़ा है जिसे आपने अपने हृदय में धारण कर लिया है?

  2. राधा नाम सों चित रांच - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (202)

    अपने मन को श्री राधा-नाम में पूर्णतः रमा दो। अपने भीतर के कागज़ (अंतःकरण) पर निर्मल और प्रेमपूर्ण रुचि के साथ राधा-नाम की रेखाएँ अंकित कर दो।

  3. मैं तो तेरे दर्शन की हूँ भिखारी - श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (125)

    मैं तो तुम्हारे दर्शन की भिखारिन हूँ, हे भानु दुलारी श्री राधा! मेरी प्रार्थना सुन लीजिए। हे सर्वेश्वरी श्यामा! आप मेरा जीवन-धन हो, आप सब गुणों की खान और अति मनोहारिणी हो।

  4. गैल श्रीवृन्दावनकी गहिये - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (228)

    श्री वृन्दावन के मार्ग में ही अनन्यता पूर्वक बढ़ना चाहिए। सेवाकुंज के कोने में बैठे युगल किशोर श्री राधा कृष्ण की छवि को निहारना चाहिए ।

  5. युगल छबि देखि मेरो हियरा सिरात - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, शयन लीला (3)

    श्री नारायण स्वामी सखी भाव में एक सखी से कहते हैं "हे सखी, युगल किशोर श्यामाश्याम नींद से भरे हुए झूमते हुए चल रहे हैं, अंग-अंग शिथिल हो गए हैं, इनकी यह छवि देख मेरा ह्रदय शीतल हो रहा है।"

  6. अब विलम्ब जिन करहुँ लाड़िली - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी

    हे लाड़िली जी, अब तनिक भी विलंभ न करें एवं मुझ पर कृपा की दृष्टि डालें । ऐसी कृपा करिए कि मैं साँझ सवेरे यमुना पुलिन एवं गहवर वन में विचरण करूँ ।

  7. राधा नाम पै मैं वारी - श्री ललित किशोरी - अभिलाष माधुरी

    मैं स्वयं को श्री राधा नाम पर बार-बार बलिदान कर देता हूं। वह राधा नाम ही है जिसे रसिक बिहारी श्री कृष्ण मधुर मधुर मुरली में प्रेम पूर्वक गाते हैं ।

  8. मेरी तो जीवन राधा - हरिराए जी

    यह मान लीला का पद है। श्री कृष्ण कहते हैं कि मेरी जीवन एक मात्र श्री राधा रानी हैं, और उनको देखे बिना मुझे चैन नहीं है। हे प्यारी, मेरे से क्या कोई चूक हो गई है, आप मुझे अपना संग नहीं दे रहीं ?

  9. साँवरे की जिन निरखी मुसिक्यान - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, युगल छदम लीला (7)

    जिन्होंने सांवरिया की मुस्कान की झलक देख ली, वह तो बिना बरछी एवं बाण के ही घायल हो गए। उनके लिए मानो एक क्षण के लिए भी धीरज धारण करना वैसे ही कठिन है जैसे मीन का जल बिना धीरज धारण करना है

  10. अब विलम्ब जिन करहुँ लाड़िली - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२६)

    हे प्यारी श्री किशोरीजू, कृप्या देरी न करें! प्रत्यक्ष मेरी ओर अनुग्रहपूर्ण दृष्टि करें। श्री यमुनाजी और श्री ब्रज के किनारे गह्वर वन में मैं बस लगातार भटकता रहूँ । फिर मैं निर्बाध रूप से श्री युगल किशोर की रूप माधुरी को निहारूँगा ।

  11. राजत निकुंज धाम ठकुरानी - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी

    ब्रज की ठकुरानी श्री राधा को फूलों के एक बिस्तर पर वृंदावन के निकुंज वन में बैठाया गया है और मधुर धुनों में गाए जा रहे मधुर धुनों को सुनने के साथ धुन को निर्देश भी दे रहीं हैं । श्री ललिताजी उनके पास बैठी हैं, गा रहीं हैं और उनके चरण दबा रहीं हैं।

  12. राधा नाम की गति न्यारी - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (206)

    राधा नाम कि महिमा अपरम्पार है। यदि सपने में भी कोई राधा नाम पुकारता है, तो यह राधा नाम ठाकुर जी को उस जीव के समीप आने पर विवश कर देता है | श्री वृन्दावन धाम के सुन्दर दिव्य किशोर किशोरी अर्थात युगल सरकार, रसिक वैष्णव वाणी, और समस्त मधुर वातावरण बरबस भक्त हृदय को मोहने वाला है | श्री ललित किशोरी के शब्दों में वह नित्य श्री वृन्दावन धाम को पाकर बार बार बलिहार जाते हैं की |

  13. राधा नाम को आधार - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०५)

    श्री ललित किशोरी जी कहते हैं की उनके जीवन का आधार एक मात्रा श्री राधा नाम ही है | यह वह दिव्य नाम है जो श्री लाल जी निरंतर रटन करते हैं एवं समस्त रस का मानो सार ही राधा नाम है | श्री ललित किशोरी जी के विनम्र शब्दों में, "यूँ तो मैं गुण हीन, अशुद्ध हृदय युक्त, दीन एवं समस्त पतितों में शिरोमणि हूँ लेकिन केवल और केवल श्री राधा नाम एवं श्री किशोरीजी के बल से दोनों पॉंव पसार कर अर्थात निर्भय होकर सोता हूँ" |

  14. राधा नाम को उर धार - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०४)

    आपको केवल राधा नाम को हृदय से धारण करना है, यह मान कर की किशोरीजी के नाम में वह बैठी हैं। आपको बिना प्रयास के ही श्याम सुन्दर कुञ्ज द्वार में मिल जाएंगे। श्री ललित किशोरीजी के शब्दों में राधा कृष्ण के रस को आठों याम अँखियाँ चखेंगी और निकुंज विहार रस प्राप्त होगा और संसार का समस्त बड़े से बड़ा सुख भी तुच्छ लगेगा।

  15. राधा नाम को आराध - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०७)

    हे जीवों, यदि आप वास्तव में अपना लक्ष्य शीघ्र प्राप्त करना चाहते हैं, तो हर दूसरे आध्यात्मिक साधन को त्याग दें, बस हर श्वास के साथ श्री राधा का नाम जपाने पर ध्यान दें। मेरा विश्वास करो, आप जल्द ही 'श्याम सुंदर' को बिना किसी प्रयास के प्राप्त कर लोगे, जो प्रेम रस के अनंत महासागर हैं और समस्त दिव्य कामनाएं पूर्ण हो जाएंगी और श्री वृंदावन धाम का नित्य वास प्राप्त होगा |