चांपनको करकंज पगन के - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (229)
मेरे कमल रूपी हाथ श्रीयुगल सरकार के कोमल चरणों और अंगों की सेवा-चांपन करने के लिए सदा वहीं टिके रहें।
राग देश रात्री के दूसरे प्रहर में गाया जाता है। (9 बजे से 12 बजे)
22 संकीर्तन उपलब्ध हैं
मेरे कमल रूपी हाथ श्रीयुगल सरकार के कोमल चरणों और अंगों की सेवा-चांपन करने के लिए सदा वहीं टिके रहें।
हे स्वामिनी! कृपा करके मुझे अपने निज धाम श्री वृन्दावन का वास प्रदान कीजिये। हे करुणामयी! क्या कारण है कि आपने मुझे अपनी स्मृति से विस्मृत कर दिया है? हा राधे! आपने मुझे अपने महल की टहल (सेवा) से क्यों वंचित कर दिया? मुझसे ऐसा कौन सा अपराध बन पड़ा है जिसे आपने अपने हृदय में धारण कर लिया है?
अपने मन को श्री राधा-नाम में पूर्णतः रमा दो। अपने भीतर के कागज़ (अंतःकरण) पर निर्मल और प्रेमपूर्ण रुचि के साथ राधा-नाम की रेखाएँ अंकित कर दो।
मैं तो तुम्हारे दर्शन की भिखारिन हूँ, हे भानु दुलारी श्री राधा! मेरी प्रार्थना सुन लीजिए। हे सर्वेश्वरी श्यामा! आप मेरा जीवन-धन हो, आप सब गुणों की खान और अति मनोहारिणी हो।
कब मैं श्री प्यारी जू [राधा] की चरण नख चंद्रिका को अपनी इन नयनों से निहारूँगी ।
हे स्वामिनी (राधारानी) ऐसा मुझसे कौन सा अपराध बन गया कि आपने मुझे भुला ही दिया ।
श्री वृन्दावन के मार्ग में ही अनन्यता पूर्वक बढ़ना चाहिए। सेवाकुंज के कोने में बैठे युगल किशोर श्री राधा कृष्ण की छवि को निहारना चाहिए ।
सुख से शैय्या पर पौढ़ी श्री राधा ने सूरत-युद्ध को जीत लिया है एवं दिव्य प्रेम के दांव और अपने हाव-भावों से श्री कृष्ण को विवश कर दिया है ।
हमारा संपूर्ण नाता श्री राधा नाम से ही है जिसके लेने से श्री श्याम सुंदर के प्रति प्रगाढ़ प्रीति उत्पन्न हो जाती है ।
हमारा संपूर्ण नाता श्री राधा नाम से ही है जिसके लेने से श्री श्याम सुंदर के प्रति प्रगाढ़ प्रीति उत्पन्न हो जाती है ।
श्री नारायण स्वामी सखी भाव में एक सखी से कहते हैं "हे सखी, युगल किशोर श्यामाश्याम नींद से भरे हुए झूमते हुए चल रहे हैं, अंग-अंग शिथिल हो गए हैं, इनकी यह छवि देख मेरा ह्रदय शीतल हो रहा है।"
हे लाड़िली जी, अब तनिक भी विलंभ न करें एवं मुझ पर कृपा की दृष्टि डालें । ऐसी कृपा करिए कि मैं साँझ सवेरे यमुना पुलिन एवं गहवर वन में विचरण करूँ ।
मैं स्वयं को श्री राधा नाम पर बार-बार बलिदान कर देता हूं। वह राधा नाम ही है जिसे रसिक बिहारी श्री कृष्ण मधुर मधुर मुरली में प्रेम पूर्वक गाते हैं ।
यह मान लीला का पद है। श्री कृष्ण कहते हैं कि मेरी जीवन एक मात्र श्री राधा रानी हैं, और उनको देखे बिना मुझे चैन नहीं है। हे प्यारी, मेरे से क्या कोई चूक हो गई है, आप मुझे अपना संग नहीं दे रहीं ?
जिन्होंने सांवरिया की मुस्कान की झलक देख ली, वह तो बिना बरछी एवं बाण के ही घायल हो गए। उनके लिए मानो एक क्षण के लिए भी धीरज धारण करना वैसे ही कठिन है जैसे मीन का जल बिना धीरज धारण करना है
हे प्यारी श्री किशोरीजू, कृप्या देरी न करें! प्रत्यक्ष मेरी ओर अनुग्रहपूर्ण दृष्टि करें। श्री यमुनाजी और श्री ब्रज के किनारे गह्वर वन में मैं बस लगातार भटकता रहूँ । फिर मैं निर्बाध रूप से श्री युगल किशोर की रूप माधुरी को निहारूँगा ।
ब्रज की ठकुरानी श्री राधा को फूलों के एक बिस्तर पर वृंदावन के निकुंज वन में बैठाया गया है और मधुर धुनों में गाए जा रहे मधुर धुनों को सुनने के साथ धुन को निर्देश भी दे रहीं हैं । श्री ललिताजी उनके पास बैठी हैं, गा रहीं हैं और उनके चरण दबा रहीं हैं।
राधा नाम कि महिमा अपरम्पार है। यदि सपने में भी कोई राधा नाम पुकारता है, तो यह राधा नाम ठाकुर जी को उस जीव के समीप आने पर विवश कर देता है | श्री वृन्दावन धाम के सुन्दर दिव्य किशोर किशोरी अर्थात युगल सरकार, रसिक वैष्णव वाणी, और समस्त मधुर वातावरण बरबस भक्त हृदय को मोहने वाला है | श्री ललित किशोरी के शब्दों में वह नित्य श्री वृन्दावन धाम को पाकर बार बार बलिहार जाते हैं की |
श्री ललित किशोरी जी कहते हैं की उनके जीवन का आधार एक मात्रा श्री राधा नाम ही है | यह वह दिव्य नाम है जो श्री लाल जी निरंतर रटन करते हैं एवं समस्त रस का मानो सार ही राधा नाम है | श्री ललित किशोरी जी के विनम्र शब्दों में, "यूँ तो मैं गुण हीन, अशुद्ध हृदय युक्त, दीन एवं समस्त पतितों में शिरोमणि हूँ लेकिन केवल और केवल श्री राधा नाम एवं श्री किशोरीजी के बल से दोनों पॉंव पसार कर अर्थात निर्भय होकर सोता हूँ" |
आपको केवल राधा नाम को हृदय से धारण करना है, यह मान कर की किशोरीजी के नाम में वह बैठी हैं। आपको बिना प्रयास के ही श्याम सुन्दर कुञ्ज द्वार में मिल जाएंगे। श्री ललित किशोरीजी के शब्दों में राधा कृष्ण के रस को आठों याम अँखियाँ चखेंगी और निकुंज विहार रस प्राप्त होगा और संसार का समस्त बड़े से बड़ा सुख भी तुच्छ लगेगा।