राग मल्हार

राग मल्हार मूसलाधार बारिश से जुड़ा है और यह राग इतना शक्तिशाली है कि जब गाया जाता है, तो यह बारिश को प्रेरित कर सकता है।

73 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. नीके द्रुम फूले-फूल सुभग - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (29)

    परम पावन श्री यमुनाजी के पुलिन पर समस्त तरु-लताओं में अलौकिक पुष्प विकसित हो रहे हैं। आकाश में सघन श्याम-घटाओं के मध्य सतरंगी इंद्रधनुष की अनुपम छटा सुशोभित हो रही है।

  2. दोऊ जन क्रीडत हैं बन माँहि - श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (720)

    युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण) वृन्दावन में क्रीड़ा कर रहे हैं। चारों दिशाओं से उमड़ते-घुमड़ते हुए काले बादलों को देखकर उनके हृदय में आनंद समा नहीं रहा है।

  3. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (21)

    हे प्यारी जू! मेरी यही अभिलाषा है कि मैं नित-निरंतर आपको इसी प्रकार निहारता रहूँ। आपके इस चंद्रमा के समान सुंदर मुखमंडल की नज़र उतारने के लिए मैं तिनका तोडूँ और राई-नमक न्योछावर करूँ।

  4. हिंडोरे झूलत री सुरंग चूनरी पहिरें - श्री हित रूप लाल

    सुंदर रंगों वाली चुनरी धारण किए श्री प्रिया जी मनोहर हिंडोले में झूल रही हैं। उनके प्रियतम लाल बिहारी बड़े अनुराग और उत्साह से उन्हें झुला रहे हैं और प्रेमवश बार-बार उन पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर रहे हैं। श्री राधा के अनुपम सौंदर्य की लहरें चारों ओर छा रही हैं।

  5. झूलत फूलत कुंजविहारी - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्ध (321)

    निकुंज में कुंजविहारी झूला झूल रहे हैं एवं प्रफुल्लित हो रहे हैं, और दूसरी ओर किशोरवल्लभा, वृषभानु की दुलारी, श्री राधा महारानी विराजमान हैं।

  6. निकुंज में ठाढ़े जुगल किसोर - श्री रूप मंजरी

    निकुंज में युगल सरकार, श्री राधा-कृष्ण युगल अत्यंत सुशोभित हैं, दोनों ने एक-दूसरे के गले में बाँहें डाल रखी हैं। आलस्य से भरी प्रभात बेला में वे जागे हैं, और उनके प्रेम की छाया से मानो भोर भी रंजित हो गई है।

  7. जो कोऊ वृन्दाविपिन बसै - श्री हित दामोदर दास, फुटकर वाणी (172)

    जो कोई भी श्रीधाम वृन्दावन में वास करता है — चाहे उसके पाप पर्वत के समान भारी क्यों न हों, वृन्दावन के प्रभाव से वे सहज ही नष्ट हो जाते हैं ।

  8. गरजनि घन अरु दामिनी - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (68)

    वर्षा ऋतु के आगमन पर मेघों की गर्जना, विद्युत की चमक, चातक, कोयल, शुक और मोर के मधुर स्वर वातावरण को सुखमय बना रहे हैं। काजल से भी अधिक काले बादल चारों ओर से उमड़-घुमड़ कर आकाश कर घिर आए हैं।

  9. झूलत ये दोऊ रूप अपार - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, वन कुंजन झूलन लीला (25)

    असीम रूप-सौंदर्य वाले श्री श्याम-श्यामा दोनों झूला झूल रहे हैं। वृषभानु सुता श्री राधा गोरी अत्यंत भोली हैं, और नंदकुमार अनुपम छवि के भंडार हैं।

  10. सघन बन झूलें दोऊ सुकुमार - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वन झूलन लीला (24)

    वृंदावन के हरे-भरे, सघन वन में युगल किशोरी श्री राधा-कृष्ण एक संग झूला झूल रहे हैं। उनके हृदय हर्षोन्माद से भरे हुए हैं, वे बार-बार एक-दूसरे की छवि निहार रहे हैं, और प्रत्येक क्षण उनका प्रेम और अधिक बढ़ता जा रहा है।

  11. नव किशोरी नव किशोर बनी है विचित्र जोरी - श्री चतुर्भुज दास

    युगल किशोरी-किशोर नवयौवन से युक्त, अनुपम सौंदर्य की दिव्य मूर्तियाँ हैं। श्रीकृष्ण, जो स्वयं कामदेव को मोहित करने वाले हैं, सौंदर्य के सागर हैं; और श्रीराधा, रूप-लावण्य की साक्षात मूर्ति हैं।

  12. छबि निधि बिहरत प्रीतम प्यारी - श्री किशोरी अलि

    सुंदरता की निधि, श्री प्रीतम प्यारी (श्री राधा कृष्ण), वृंदावन में विचरण कर रहे हैं। वे सघन बादलों से बरसते हुए जल और वृंदावन के हरे-भरे वनों को निहार रहे हैं।

  13. कदँब तर ठाड़े हैं पिय प्यारी - श्री विट्ठल दास

    हे सखियों! आज की कैसी अद्भुत शोभा बनी है। प्रीतम श्री कृष्ण के मस्तक पर तो मोर मुकुट शोभा दे रहा है और प्रियाजी श्री राधा ने सुंदर लहरिया की सारी पहन रखी है।

  14. गिरी गोधन पर दोऊ ठाड़े ललित कदम्ब तरै - श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)

    श्री गिरिराज गोवर्धन पर युगल सरकार श्री राधा कृष्ण सुंदर कदंब वृक्ष के नीचे खड़े हैं । वे रस में ऐसे भीजें हुए हैं मानो घन (मेघ) एवं दामिनी (बिजली) एक दूसरे को आलिंगित किए हुए हो ।