श्री अभय राम

श्री अभय राम, श्री राधा कृष्ण के भक्त और वृंदावन निम्बार्क सम्प्रदाय के एक रसिक संत हैं।

26 लेख उपलब्ध हैं

  1. धन-धन वृन्दावन के लवा बटेर - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (72)

    धन्य हैं श्री वृन्दावन के लवा और बटेर पक्षी। बाज के भय से वे दिन-रात कुंजों की ओट के भीतर दुबकेहुए बैठे रहते हैं, फिर भी कभी वृन्दावन छोड़कर बाहर नहीं जाते और सदा कुंजों की शरण लिए रहते हैं।

  2. धन धन वृन्दावन गोपेश्वर बाबा - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (07)

    श्री वृन्दावन के गोपेश्वर महादेव धन्य, धन्य हैं। उन्होंने वंशीवट पर अपनी बैठक बनाई है और वे वृन्दावन के कोतवाल (रक्षक) होने का अधिकार रखते हैं।

  3. धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (02)

    श्री वृन्दावन में प्रवाहित होती श्री यमुना जी का जल परम धन्य है। जब यमुना जी की लहरें उठकर शरीर का स्पर्श करती हैं, तो वे संचित पापों के घने समूह (परतों) को सहजता से काट देती है।

  4. धन धन वृन्दावन की लता प्यारी - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (01)

    वृन्दावन की प्यारी-प्यारी लताएँ धन्य-धन्य हैं जो कदम के वृक्षों से लिपटी हुई मधुरता से ख‍िल रही हैं, और जिनके ऊपर काली कोयलें मधुर स्वर में गान कर रही हैं।

  5. धन धन वृन्दावन में वसैं कुम्हार - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (98)

    वृंदावन में रहने वाले कुम्हार धन्य हैं—वे चाक चलाकर ब्रज रज के सुंदर-सुंदर बर्तन बनाते हैं और करूवा एवं कुलरा (कुल्हड़) गढ़ते हैं।

  6. धन धन वृन्दावन की मालिन प्यारी - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (114)

    श्री वृंदावन धाम की प्यारी मालिन धन्य-धन्य है! वह ठाकुरजी के द्वार पर बैठकर प्रेमपूर्वक उनके लिए सुंदर-सुंदर फूलों की मालाएँ पिरोती हैं।

  7. श्री अभयराम जी की जीवनी

    श्री अभयराम जी जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्री 'श्रीजी' श्री निम्बार्कशरण देवाचार्य जी के शिष्य थे। श्री अभयराम जी की जन्म तिथि का ठीक-ठीक पता नहीं चलता पर अन्तः साक्ष्य एवं वंश परम्परा के आधार पर ज्ञात होता है कि इनका जन्म 1830-1835 ईसवी के आसपास हुआ होगा।

  8. धन धन वृंदावन के विरक्त सन्त - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (82)

    श्री वृंदावन धाम के विरक्त संत धन्य धन्य हैं । सुबह होते ही यह संत श्री यमुना जी में नहाते हैं एवं यहाँ की परम पावन रज का सेवन करते हैं (एवं अपने अंगों पर धारण करते हैं ) ।

  9. धन धन वृन्दावन के गदहा प्यारे - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (80)

    श्री वृंदावन धाम के प्यारे गधे धन्य हैं जो अपनी पीठ पर मिट्टी एवं ईंट को ढोते हैं एवं सब के घरों एवं मंदिरों के निर्माण में सहायता करते हैं ।