वन्दौं श्रीराधा-हरिकौ अनुराग तन - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (03)
मैं श्रीराधा और श्रीहरि के दिव्य अनुराग की वंदना करता हूँ। उन दोनों के तन और मन मिलकर एक हो गए हैं जो अनेक लीला-रसों के रंगों से भरे हैं, मानो जैसे राग और रागिनी परस्पर मिलकर एक हो गए हों।
