धन-धन बृन्दाविपिन बसैं हलवाई - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (95)
श्री वृन्दावन धाम में निवास करने वाले हलवाइ अत्यंत धन्य और सौभाग्यशाली है। वे परम प्रेम से अत्यंत सुंदर जलेबी, खुरमा, खाजा और मलाई इत्यादि मिष्ठान तैयार करते हैं।
वृंदावन रहस्य विनोद वृंदावन की महिमा को उजागर करता है जिसमें वृंदावन के वृक्ष,पक्षी, जीव जंतु इत्यादि की महिमा का गान बहुत सुंदर ढंग से किया गया है जिसे निम्बार्क संप्रदाय के श्री अभयराम द्वारा रचा गया है ।
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श्री वृन्दावन धाम में निवास करने वाले हलवाइ अत्यंत धन्य और सौभाग्यशाली है। वे परम प्रेम से अत्यंत सुंदर जलेबी, खुरमा, खाजा और मलाई इत्यादि मिष्ठान तैयार करते हैं।
धन्य हैं श्री वृन्दावन के लवा और बटेर पक्षी। बाज के भय से वे दिन-रात कुंजों की ओट के भीतर दुबकेहुए बैठे रहते हैं, फिर भी कभी वृन्दावन छोड़कर बाहर नहीं जाते और सदा कुंजों की शरण लिए रहते हैं।
श्री वृन्दावन के गोपेश्वर महादेव धन्य, धन्य हैं। उन्होंने वंशीवट पर अपनी बैठक बनाई है और वे वृन्दावन के कोतवाल (रक्षक) होने का अधिकार रखते हैं।
श्री वृन्दावन में प्रवाहित होती श्री यमुना जी का जल परम धन्य है। जब यमुना जी की लहरें उठकर शरीर का स्पर्श करती हैं, तो वे संचित पापों के घने समूह (परतों) को सहजता से काट देती है।
वृन्दावन में रहने वाले पपीहे धन्य हैं। वे अन्य जल नहीं पीते, केवल स्वाति नक्षत्र की बूंद की ही प्रतीक्षा करते हैं।
वृन्दावन की प्यारी-प्यारी लताएँ धन्य-धन्य हैं जो कदम के वृक्षों से लिपटी हुई मधुरता से खिल रही हैं, और जिनके ऊपर काली कोयलें मधुर स्वर में गान कर रही हैं।
वृंदावन में रहने वाले कुम्हार धन्य हैं—वे चाक चलाकर ब्रज रज के सुंदर-सुंदर बर्तन बनाते हैं और करूवा एवं कुलरा (कुल्हड़) गढ़ते हैं।
धन्य धन्य हैं वृन्दावन की पनिहारियाँ। प्रातःकाल यमुना में स्नान करने सभी गोप-कन्याएँ आती हैं।
श्री वृंदावन धाम की प्यारी मालिन धन्य-धन्य है! वह ठाकुरजी के द्वार पर बैठकर प्रेमपूर्वक उनके लिए सुंदर-सुंदर फूलों की मालाएँ पिरोती हैं।
श्री वृन्दावन के श्वान (कुत्ते) धन्य धन्य हैं, जो यमुना घाटों और गलियों में सोते हैं और चोरों से रक्षा करते हैं।
धन्य धन्य हैं श्री वृंदावन की गायें, जिन्हें स्वयं श्री कृष्ण नंगे पैरों से चराने ले जाते हैं।
श्री वृंदावन धाम की कोयलें धन्य हैं, जो सदा वृंदावन के बागों में रहकर मतवारी होकर बोलती हैं।
वृंदावन के तोते धन्य, धन्य हैं । वृंदावन के वृक्षों के कोटर में ही इनका जन्म बड़े भाग्य से होता है।
श्री वृंदावन धाम के बंदर धन्य धन्य हैं जो किसी की नहीं मानते, सभी के सामान लूट लेते हैं ।
श्री वृंदावन धाम के विरक्त संत धन्य धन्य हैं । सुबह होते ही यह संत श्री यमुना जी में नहाते हैं एवं यहाँ की परम पावन रज का सेवन करते हैं (एवं अपने अंगों पर धारण करते हैं ) ।
श्री वृंदावन धाम के गोसाईं धन्य धन्य हैं । यह सुंदर आसन डाल कर जप करने बैठते हैं, इनके समान दूसरा कौन होगा ।
श्री वृंदावन धाम के प्यारे गधे धन्य हैं जो अपनी पीठ पर मिट्टी एवं ईंट को ढोते हैं एवं सब के घरों एवं मंदिरों के निर्माण में सहायता करते हैं ।
श्री वृन्दावन के मोर धन्य हैं, जो कुंजों के ऊपर नृत्य करते हैं एवं जिन्हें श्री कृष्ण देखते हैं ।
धन्य है वृंदावन की चींटी जो महाप्रसाद का कण लेकर बिल में बैठ कर खाती है ।
श्री वृंदावन धाम के मेंडक धन्य धन्य हैं जो ठाकुर जी के मंदिर की नाली में बैठ कर न्यारे न्यारे ढंग से बोलते हैं ।